class 10 Hindi - Notes

Chapter 5 - यह दंतुरित मुसकान

1. पाठ परिचय (Introduction)

इस कविता में कवि नागार्जुन ने एक छोटे बच्चे की मनमोहक मुस्कान का वर्णन किया है। कवि घुमक्कड़ स्वभाव के हैं और लंबे समय बाद घर लौटे हैं। उनका छोटा बच्चा (जिसके अभी-अभी नए दाँत निकले हैं) उन्हें पहचान नहीं पाता। कवि बच्चे की उस निश्छल हंसी को देखकर मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। उन्हें लगता है कि बच्चे की मुस्कान में इतनी ताकत है कि वह किसी उदास और निराश व्यक्ति (मृतक) में भी जान डाल सकती है।


2. पद्यांशों की विस्तृत व्याख्या

पद्यांश 1: “तुम्हारी यह दंतुरित मुसकान… पिघलकर जल बन गया होगा कठिन पाषाण”

भावार्थ: कवि बच्चे को संबोधित करते हुए कहते हैं कि तुम्हारे ये नए-नए निकले हुए छोटे-छोटे दांतों वाली मुस्कान इतनी प्रभावशाली है कि:

  1. मृतक में भी जान डाल दे: इसका अर्थ यह नहीं कि मुर्दा जिंदा हो जाएगा। इसका लाक्षणिक अर्थ है कि अगर कोई व्यक्ति जीवन से हार चुका है, बहुत उदास या निराश है, तो वह भी इस मुस्कान को देखकर खुशी से भर जाएगा। उसे जीने की इच्छा होने लगेगी।

  2. कमल का झोपड़ी में खिलना: बच्चे का शरीर धूल से सना हुआ है (धूलि-धूसर)। कवि को लगता है कि कमल का फूल तालाब छोड़कर मेरी गरीब झोपड़ी में आ गया है। यह पंक्ति बच्चे की सुंदरता और पवित्रता को दिखाती है।

  3. पत्थर का पिघलना: कवि कहते हैं कि शायद तुम्हें छूकर ही कठोर पत्थर (पाषाण) पिघलकर पानी बन गया होगा। इसका मतलब है कि इस बच्चे की मुस्कान और स्पर्श से कठोर दिल वाला इंसान भी भावुक और कोमल हो जाता है।

शब्दार्थ:

  • दंतुरित: बच्चों के नए-नए निकले दाँत।

  • मृतक: मरा हुआ / हताश व्यक्ति।

  • धूलि-धूसर: धूल से सना हुआ शरीर।

  • जलजात: कमल का फूल (जल में उत्पन्न)।

  • गात: शरीर।


पद्यांश 2: “छू गया तुमसे कि झरने लग पड़े शेफालिका के फूल… मैं समझ न पाया”

भावार्थ: कवि कहते हैं कि मेरे जीवन में बांस और बबूल (Bamboo and Acacia) जैसी रुखापन और कठोरता थी। लेकिन तुम्हारे कोमल स्पर्श का जादू ऐसा है कि मुझे लगा जैसे शेफालिका के फूल झरने लगे हों।

  • बांस और बबूल: यह कवि के नीरस और संघर्षपूर्ण जीवन का प्रतीक है।

  • शेफालिका के फूल: यह कोमलता, सुगंध और खुशी का प्रतीक है। अर्थात, बच्चे के स्पर्श ने कवि के नीरस जीवन को खुशियों से भर दिया है। कवि इतने हैरान हैं कि वे समझ नहीं पा रहे कि यह जादू कैसे हुआ।


पद्यांश 3: “तुम मुझे पाए नहीं पहचान? देखते ही रहोगे अनिमेष?”

भावार्थ: चूंकि कवि बहुत दिनों बाद घर लौटे हैं, बच्चा उन्हें पहचान नहीं पा रहा है। वह कवि को एकटक (अनिमेष) बिना पलक झपकाए देख रहा है, जैसे कोई अजनबी को देखता है।

  • कवि बच्चे से पूछते हैं – “क्या तुम थक गए हो मुझे देखते-देखते? चलो, मैं ही अपनी आँखें फेर लेता हूँ ताकि तुम्हें आराम मिले।”

  • यह एक बहुत ही स्वाभाविक बाल-मनोविज्ञान (Child Psychology) है कि बच्चे अजनबियों को घूरते हैं।


पद्यांश 4: “धन्य तुम, माँ भी तुम्हारी धन्य… मधुपर्क”

भावार्थ: इस हिस्से में कवि माँ की भूमिका को स्वीकार करते हैं।

  • कवि प्रवासी (बाहर रहने वाले) हैं, इसलिए बच्चे के लिए वे ‘इतर’ (दूसरा/पराया) हैं।

  • वे कहते हैं – “यदि तुम्हारी माँ माध्यम न बनी होती, तो मैं आज तुम्हारी यह दंतुरित मुस्कान देख ही नहीं पाता।”

  • मधुपर्क: कवि कहते हैं कि तुम्हारी माँ तुम्हें ‘मधुपर्क’ (पंचामृत) चटाती रही, यानी उन्होंने ही तुम्हें पाल-पोसकर बड़ा किया और अपना स्नेह दिया।


पद्यांश 5: “जब-जब तुम मुझे देखते कनखी मार…”

भावार्थ: अंत में, जब बच्चे की नजर कवि से मिलती है और वह पहचान बनाने की कोशिश करता है, तो वह तिरछी नजरों (कनखी) से देखता है।

  • जब उसकी आँखें कवि की आँखों से मिलती हैं, तो वह मुस्कुरा देता है।

  • कवि कहते हैं – “जब तुम कनखी मार कर देखते हो और तुम्हारी यह दंतुरित मुस्कान मुझे दिखती है, तो मुझे तुम्हारी छवि बहुत प्यारी (छविमान) लगती है।”


3. काव्य-सौंदर्य (Literary Devices)

वेबसाइट पर “काव्य-सौंदर्य” का अलग सेक्शन जरूर बनाएं, यह अच्छे अंक दिलाता है।

  1. अलंकार:

    • अतिशयोक्ति: “पिघलकर जल बन गया होगा कठिन पाषाण” (पत्थर का पिघलना बढ़ा-चढ़ाकर कही गई बात है)।

    • अनुप्रास: “धूलि-धूसर” (ध वर्ण की आवृत्ति)।

    • उत्प्रेक्षा: “छोड़कर तालाब मेरी झोपड़ी में खिल रहे जलजात” (मानो कमल खिल रहे हों)।

  2. भाषा: खड़ी बोली हिंदी (जिसमें तत्सम शब्दों जैसे- गात, जलजात, पाषाण का प्रयोग है)।

  3. गुण: माधुर्य गुण (पढ़ने में मीठी कविता)।

  4. बिंब (Imagery): दृश्य बिंब (Visual Imagery) का सुंदर प्रयोग है। पाठक के सामने बच्चे की धूल भरी सूरत और कमल का दृश्य बन जाता है।


4. महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर (Important Questions for Website)
  • प्रश्न 1: बच्चे की दंतुरित मुसकान का कवि के मन पर क्या प्रभाव पड़ा?

    • उत्तर: कवि का निराश मन प्रसन्नता से भर गया। उन्हें लगा जैसे उनकी झोपड़ी में कमल खिल गए हों और पत्थर पिघलकर जल बन गया हो। उन्हें अपना नीरस जीवन (बांस/बबूल) भी सुगंधित (शेफालिका) लगने लगा।

  • प्रश्न 2: कवि ने बच्चे की मुस्कान के सौंदर्य को किन-किन बिंबों  के माध्यम से व्यक्त किया है?

    • उत्तर: (1) मृतक में जान डालना, (2) तालाब छोड़कर झोपड़ी में खिले कमल, (3) पत्थर का पिघलकर जल बनना, (4) बांस/बबूल से शेफालिका के फूल झरना।

  • प्रश्न 3: ‘मधुपर्क’ का क्या अर्थ है?

    • उत्तर: मधुपर्क का शाब्दिक अर्थ है- मधु (शहद) का मिश्रण। प्राचीन काल में दही, घी, शहद, जल और दूध को मिलाकर ‘पंचामृत’ बनाया जाता था, जिसे बच्चों को चटाया जाता था ताकि वे स्वस्थ रहें। यहाँ यह माँ के स्नेह का प्रतीक है।

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