कक्षा 10 हिंदी महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर

पाठ 1 - सूरदास के पद

नमस्ते दोस्तों! अगर आप हरियाणा बोर्ड (HBSE) या CBSE कक्षा 10वीं की तैयारी कर रहे हैं, तो हिंदी की पाठ्यपुस्तक ‘क्षितिज भाग-2’ का पहला पाठ “सूरदास के पद” बहुत ही महत्वपूर्ण है। बोर्ड परीक्षा में इस पाठ से अक्सर प्रश्न पूछे जाते हैं। इस पाठ में सूरदास जी ने गोपियों और उद्धव के बीच हुए संवाद को बहुत ही सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया है। जब कृष्ण मथुरा चले जाते हैं और खुद न आकर उद्धव के जरिए योग का संदेश भेजते हैं, तो गोपियाँ किस तरह उद्धव पर व्यंग्य (taunt) करती हैं, यही इस पाठ का सार है।

नीचे दिए गए प्रश्न परीक्षा के लिए सबसे ज्यादा संभावित (Most Important) हैं। इन्हें रटने की बजाय इनकी भावनाओं को समझने की कोशिश करें।

सूरदास के पद – महत्वपूर्ण प्रश्न और उत्तर
Q1. गोपियों द्वारा उद्धव को ‘भाग्यवान’ (बड़भागी) कहने में क्या व्यंग्य निहित है?

उत्तर: जब गोपियाँ उद्धव को ‘बड़भागी’ (भाग्यवान) कहती हैं, तो वे वास्तव में उनकी तारीफ नहीं कर रही हैं, बल्कि उन पर टांट (व्यंग्य) कस रही हैं। गोपियों का कहना है कि तुम बहुत बदनसीब हो। तुम साक्षात प्रेम के सागर श्री कृष्ण के पास रहते हो, फिर भी तुम्हारे दिल में उनके लिए रत्ती भर भी प्रेम नहीं जागा। तुम उनके पास रहकर भी उनके प्यार के धागे में नहीं बंध पाए। गोपियों को लगता है कि जिस तरह पानी में रहकर भी कमल का पत्ता गीला नहीं होता, वैसे ही उद्धव कृष्ण के पास रहकर भी उनके प्रेम से अछूते रह गए। इसलिए वे कटाक्ष करते हुए कहती हैं कि तुमसे बड़ा अभागा और कौन हो सकता है जिसने कृष्ण का प्रेम नहीं पाया।

Q2. उद्धव के व्यवहार की तुलना किस-किस से की गई है?

उत्तर: गोपियों ने उद्धव के रूखे और नीरस व्यवहार की तुलना मुख्य रूप से दो चीजों से की है:

  1. कमल का पत्ता: गोपियाँ कहती हैं कि उद्धव उस कमल के पत्ते की तरह हैं जो रहता तो पानी (कृष्ण) के भीतर है, लेकिन उस पर पानी की एक भी बूंद नहीं टिकती। यानी कृष्ण का असर उन पर नहीं हुआ।

  2. तेल की मटकी: उद्धव उस तेल लगी हुई गगरी (मटकी) के समान हैं, जिसे अगर पानी में डुबोया जाए, तो भी पानी की एक बूंद उस पर नहीं ठहरती। इन उदाहरणों के जरिए गोपियाँ यह कहना चाहती हैं कि उद्धव पूरी तरह से भावनाहीन और शुष्क हैं, उन पर श्री कृष्ण के प्रेम और सौंदर्य का कोई प्रभाव नहीं पड़ा है।

Q3. गोपियों ने किन-किन उदाहरणों के माध्यम से उद्धव को उलाहने दिए हैं?

उत्तर: गोपियों ने अपने मन की पीड़ा और नाराजगी जताने के लिए उद्धव को कई तरह के उलाहने (taunts) दिए हैं:

  • वे कहती हैं कि हमारी प्रेम भावनाएं हमारे मन में ही दब कर रह गईं क्योंकि कृष्ण तो आए नहीं और तुमसे हम यह बात कह नहीं सकतीं।

  • वे उद्धव के ‘योग संदेश’ को कड़वी ककड़ी के समान बताती हैं जिसे निगला नहीं जा सकता।

  • वे कहती हैं कि तुम तो हमारे लिए ऐसी बीमारी (योग) ले आए हो जो हमने न कभी देखी, न सुनी।

  • वे उद्धव को यह भी उलाहना देती हैं कि कृष्ण ने अब राजनीति पढ़ ली है, इसलिए वे खुद न आकर तुम्हें भेज रहे हैं ताकि हमें सता सकें। प्रेम की मर्यादा को उन्होंने तोड़ दिया है।

Q4. उद्धव द्वारा दिए गए योग के संदेश ने गोपियों की विरह-अग्नि में घी का काम कैसे किया?

उत्तर: गोपियाँ श्री कृष्ण के लौटने की आस लगाए बैठी थीं। वे इसी उम्मीद में अपने तन और मन की पीड़ा सह रही थीं कि एक दिन कृष्ण आएँगे और उनकी सारी तकलीफें दूर हो जाएँगी। उनका वियोग प्रेम की आग की तरह था। लेकिन जब कृष्ण ने खुद आने की जगह उद्धव को ‘योग’ और ‘निर्गुण ब्रह्म’ का संदेश लेकर भेज दिया, तो गोपियों की उम्मीद टूट गई। उद्धव ने उन्हें कृष्ण को भूलकर योग-साधना करने की सलाह दी। यह बात सुनकर गोपियों को लगा कि कृष्ण ने उन्हें त्याग दिया है। इस संदेश ने उनकी जलती हुई विरह की आग को और भड़का दिया, ठीक वैसे ही जैसे आग में घी डालने पर वह और तेज़ हो जाती है।

Q5. ‘मरजादा न लही’ के माध्यम से कौन-सी मर्यादा न रहने की बात की गई है?

उत्तर: यहाँ ‘मरजादा न लही’ के माध्यम से प्रेम की मर्यादा (Dignity of Love) की बात की गई है। प्रेम का नियम यह है कि प्रेम के बदले प्रेम ही दिया जाना चाहिए। गोपियों ने कृष्ण के लिए सब कुछ त्याग दिया और उनसे निश्छल प्रेम किया। मर्यादा के अनुसार कृष्ण को भी गोपियों के प्रेम का मान रखना चाहिए था और उन्हें दर्शन देने आना चाहिए था। लेकिन कृष्ण ने ऐसा नहीं किया। उन्होंने प्रेम के बदले ‘योग का रूखा संदेश’ भेजकर प्रेम के नियमों को तोड़ दिया। गोपियों को लगता है कि कृष्ण ने उनके साथ छल किया है और अपनी वचनबद्धता नहीं निभाई, इसी को वे ‘मर्यादा का उल्लंघन’ कहती हैं।

Q6. कृष्ण के प्रति अपने अनन्य प्रेम को गोपियों ने किस प्रकार अभिव्यक्त किया है?

उत्तर: गोपियों का प्रेम श्री कृष्ण के लिए अटूट और गहरा है। उन्होंने अपने प्रेम को जताने के लिए बहुत सुंदर तुलनाएं की हैं:

  • हारिल पक्षी की लकड़ी: वे कहती हैं कि हमारे लिए कृष्ण ‘हारिल पक्षी की लकड़ी’ की तरह हैं। जैसे हारिल पक्षी अपने पंजों में दबी लकड़ी को कभी नहीं छोड़ता, वैसे ही हमने भी कृष्ण को अपने मन, वचन और कर्म से जकड़ रखा है।

  • गुड़ और चींटी: वे कहती हैं कि हम कृष्ण के प्रेम में वैसे ही लिपटी हुई हैं जैसे गुड़ (Jaggery) से चींटियां चिपक जाती हैं और फिर चाहकर भी अलग नहीं हो पातीं, वहीं प्राण त्याग देती हैं।

  • वे दिन-रात, जागते-सोते, यहाँ तक कि सपनों में भी सिर्फ ‘कान्ह-कान्ह’ की रट लगाए रहती हैं।

Q7. गोपियों को उद्धव का योग-साधना का उपदेश कैसा लगता है?

उत्तर: गोपियों के लिए ज्ञान और योग का मार्ग बिल्कुल व्यर्थ और अरुचिकर है। जब उद्धव उन्हें योग का पाठ पढ़ाते हैं, तो उन्हें यह उपदेश ‘कड़वी ककड़ी’ जैसा लगता है। जैसे कड़वी ककड़ी को मुंह में लेते ही थूकने का मन करता है और स्वाद खराब हो जाता है, वैसे ही योग की बातें उनके मन को कड़वा कर देती हैं। गोपियों का मानना है कि योग की ज़रूरत उन लोगों को है जिनका मन चंचल है (जिनका मन ‘चक्री’ के समान है)। गोपियों का मन तो पहले से ही कृष्ण के प्रेम में स्थिर है, इसलिए उनके लिए इस योग संदेश का कोई महत्व नहीं है। वे इसे एक ऐसी बीमारी मानती हैं जिसके बारे में उन्होंने पहले कभी नहीं सुना।


एग्जाम टिप: दोस्तों, हिंदी के पेपर में उत्तर लिखते समय अपनी भाषा को सरल रखें, लेकिन ‘बड़भागी’, ‘विरह-अग्नि’, ‘मरजादा’, ‘गुर चांटी ज्यों पागी’ जैसे पाठ के मूल शब्दों (Keywords) का प्रयोग ज़रूर करें। इससे परीक्षक (Examiner) पर अच्छा प्रभाव पड़ता है और पूरे नंबर मिलने के चांस बढ़ जाते हैं।

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