class 10 Hindi - Notes

Chapter 2 - साना-साना हाथ जोड़ि...

कृतिका पाठ 2: साना-साना हाथ जोड़ि… (मधु कांकरिया)

लेखिका: मधु कांकरिया विधा: यात्रा-वृत्तांत स्थान: सिक्किम (गंतोक, यूमथांग, लायुंग, कटाओ)

1. पाठ परिचय और शीर्षक का अर्थ

इस पाठ का शीर्षक एक नेपाली प्रार्थना से लिया गया है: “साना-साना हाथ जोड़ि, गर्दहुँ प्रार्थना। हाम्रौ जीवन तिम्रौ कोसेली।” (अर्थ: छोटे-छोटे हाथ जोड़कर प्रार्थना कर रही हूँ कि मेरा सारा जीवन अच्छाइयों को समर्पित हो।) लेखिका ने सिक्किम की सुंदरता, वहां की संस्कृति और वहां के मेहनतकश लोगों के संघर्ष को अपनी आँखों से देखा और महसूस किया।


2. गंतोक: मेहनतकश बादशाहों का शहर

लेखिका ने गंतोक (गंगटोक) को ‘मेहनतकश बादशाहों का शहर’ कहा है क्योंकि वहां के लोग बहुत कड़ी मेहनत करते हैं और अपनी परिस्थितियों में खुश रहते हैं।

  • रातरानी गंतोक: रात के समय गंतोक शहर ऐसा लग रहा था मानो आकाश उल्टा हो गया हो और सारे तारे बिखरकर नीचे टिमटिमा रहे हों। उस रहस्यमयी रात ने लेखिका के मन में एक सम्मोहन (जादू) जगा दिया। वहीं उन्होंने एक नेपाली युवती से वह प्रार्थना सीखी— “साना-साना हाथ जोड़ि…”।


3. हिमालय की विराटता और तीस्ता नदी

अगली सुबह लेखिका यूमथांग के लिए निकलीं। रास्ते में हिमालय का रूप पल-पल बदल रहा था।

  • प्राकृतिक दृश्य: कभी हरियाली, कभी पीले पत्थर, तो कभी बादलों की चादर। तीस्ता नदी उनके साथ-साथ बह रही थी। ‘सेवन सिस्टर्स वाटरफॉल’ (झरना) को देखकर लेखिका को लगा जैसे उनके अंदर की सारी बुराइयां और तामसिकता उस निर्मल धारा में बह गई हो।

  • शांति: वहां का वातावरण इतना शांत था कि मानो समय थम गया हो। लेखिका को लगा कि यही सुख और शांति है।


4. सौंदर्य और श्रम का टकराव (पत्थर तोड़ती महिलाएं)

अचानक लेखिका की तंद्रा (ध्यान) टूट गई। उन्होंने देखा कि इतने स्वर्ग जैसे सुंदर वातावरण में कुछ पहाड़ी औरतें रास्ते के किनारे बैठकर पत्थर तोड़ रही थीं

  • मातृत्व और श्रम: वे औरतें कोमल थीं, लेकिन उनके हाथों में कुदाल और हथौड़े थे। कई औरतों की पीठ पर बंधी डोको (बड़ी टोकरी) में उनके छोटे बच्चे सो रहे थे।

  • विरोधाभास: यह दृश्य लेखिका को झकझोर गया। एक तरफ असीम प्राकृतिक सुंदरता और दूसरी तरफ पेट भरने के लिए जानलेवा संघर्ष। लेखिका ने सोचा— “यह क्या है? स्वर्गीय सौंदर्य के बीच भूख, मौत और जिंदा रहने की यह जंग?” बीआरओ (BRO) के कर्मचारी ने बताया कि ये पहाड़िनें रास्ता बनाने का खतरनाक काम करती हैं, जिसमें कई बार जान भी चली जाती है।


5. जितेन नार्गे और पहाड़ी बच्चों का जीवन

लेखिका का गाइड और ड्राइवर जितेन नार्गे बहुत समझदार था। उसने बताया कि पहाड़ी जीवन आसान नहीं है।

  • स्कूली बच्चे: वहां कोई स्कूल बस नहीं होती। बच्चे रोज 3-4 किलोमीटर पहाड़ चढ़कर स्कूल जाते हैं। लौटते समय वे अपनी माताओं के साथ लकड़ियों के भारी गट्ठर ढोते हैं और मवेशी चराते हैं।

  • मैदानी बनाम पहाड़ी: जितेन ने कहा- “मैडम, मैदानी इलाकों में लोगों के पास चर्बी (मोटापा) होती है, लेकिन यहां पहाड़ पर आपको कोई भी मोटा आदमी नहीं मिलेगा।”


6. कटाओ: भारत का स्विट्जरलैंड

लेखिका को बर्फ देखनी थी, लेकिन प्रदूषण के कारण ‘लायुंग’ में बर्फ कम हो गई थी।

  • कटाओ: जितेन उन्हें ‘कटाओ’ ले गया, जो बहुत ऊंचाई पर था और अभी तक पर्यटकों की भीड़ से अछूता था। इसलिए वहां प्राकृतिक सुंदरता बची हुई थी।

  • बर्फ का आनंद: कटाओ में घुटनों तक बर्फ थी। वहां का नजारा देखकर लेखिका को लगा कि शायद ऐसी ही ‘विभोर कर देने वाली दिव्यता’ के बीच वेदों की रचना हुई होगी। वहां की शांति किसी ऋषि की तपस्या जैसी थी।


7. धर्म-चक्र और पापों का नाश

वापसी में लेखिका ने ‘कुटिया’ (Prayer Wheel) में घूमता हुआ एक चक्र देखा।

  • मान्यता: जितेन ने बताया कि इसे ‘धर्म-चक्र’ (प्रेयर व्हील) कहते हैं। इसे घुमाने से सारे पाप धुल जाते हैं।

  • लेखिका का विचार: लेखिका ने सोचा कि चाहे मैदान हो या पहाड़, पूरे भारत की आत्मा एक जैसी है। लोगों की आस्थाएं, विश्वास, पाप-पुण्य की अवधारणाएं और कल्पनाएं हर जगह एक जैसी हैं। यह आस्था ही भारत को जोड़कर रखती है

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