class 10 Economics - Notes
Chapter 1 - विकास (Development)
हम अक्सर सुनते हैं कि “अमेरिका एक विकसित देश है” और “भारत एक विकासशील देश है”। लेकिन विकास का असली मतलब क्या है? क्या इसका मतलब सिर्फ ज्यादा पैसा कमाना है? या इसमें स्वास्थ्य और शिक्षा भी शामिल है? इस अध्याय में हम विकास के इन्ही पहलुओं को समझेंगे।
1. विकास क्या वादा करता है: विभिन्न व्यक्ति, विभिन्न लक्ष्य
विकास का मतलब सबके लिए एक जैसा नहीं होता। हर व्यक्ति की अपनी आकांक्षाएं होती हैं।
भूमिहीन मजदूर के लिए विकास: उसे साल भर काम मिले और बेहतर मजदूरी मिले। उसके बच्चों को स्कूल में अच्छी शिक्षा मिले।
पंजाब के समृद्ध किसान के लिए विकास: उसकी फसल का ज्यादा दाम मिले और सस्ते मजदूर मिलें।
शहरी लड़की के लिए विकास: उसे अपने भाई जितनी आजादी मिले और वह अपने फैसले खुद ले सके।
निष्कर्ष:
लोगों के विकास के लक्ष्य भिन्न (Different) हो सकते हैं।
एक के लिए जो विकास है, वह दूसरे के लिए विनाश हो सकता है।
उदाहरण: बिजली बनाने के लिए उद्योगपति बांध (Dam) चाहते हैं। लेकिन इससे वहां रहने वाले आदिवासियों की जमीन डूब जाती है और वे बेघर हो जाते हैं। यहाँ उद्योगपति के लिए जो विकास है, वह आदिवासी के लिए विनाश है।
2. आय और अन्य लक्ष्य (Income and Other Goals)
ज्यादातर लोग चाहते हैं कि उनकी आमदनी (Income) बढ़े। लेकिन क्या जीने के लिए सिर्फ पैसा काफी है?
भौतिक वस्तुएं (Material Goods): पैसे से आप कार, घर और कपड़े खरीद सकते हैं।
अभौतिक वस्तुएं (Non-material Goods): लेकिन पैसे से आप आजादी, सुरक्षा, दूसरों से आदर और बराबरी का व्यवहार नहीं खरीद सकते।
उदाहरण: अगर आपको दूर दराज के इलाके में नौकरी मिले जहाँ सैलरी बहुत ज्यादा है, लेकिन परिवार के लिए समय नहीं है और सुरक्षा नहीं है। वहीं दूसरी तरफ, कम सैलरी वाली नौकरी है लेकिन सुरक्षा और परिवार के लिए समय है। आप शायद दूसरी नौकरी चुनेंगे।
इसलिए, विकास के लिए लोग मिले-जुले लक्ष्यों को देखते हैं।
3. राष्ट्रीय विकास (National Development)
जब हम देश के विकास की बात करते हैं, तो हम देशों की तुलना कैसे करें?
इसके लिए विश्व बैंक (World Bank) एक मापदंड का उपयोग करता है जिसे ‘औसत आय’ (Average Income) या ‘प्रति व्यक्ति आय’ (Per Capita Income) कहते हैं।
फॉर्मूला:
$$\text{औसत आय} = \frac{\text{देश की कुल आय}}{\text{देश की कुल जनसंख्या}}$$वर्गीकरण (World Bank Report):
समृद्ध देश: जिनकी प्रति व्यक्ति आय बहुत अधिक है (जैसे अमेरिका, जापान)।
निम्न आय वाले देश: जिनकी आय बहुत कम है।
भारत: भारत ‘मध्यम आय’ वर्ग में आता है।
औसत आय की सीमाएं (Limitations of Average Income):
औसत आय तुलना के लिए तो ठीक है, लेकिन यह असमानताओं (Disparities) को छिपा देती है।
उदाहरण: मान लीजिए एक देश में 4 गरीब हैं और 1 बहुत अमीर है। औसत निकालने पर वह देश अमीर दिखेगा, लेकिन असलियत में वहां गरीबी है। इसलिए सिर्फ औसत आय देखना सही नहीं है।
4. आय और अन्य मापदंड (Income and Other Criteria)
सिर्फ आय से विकास नहीं मापा जा सकता। इसे समझने के लिए हम भारत के राज्यों की तुलना करते हैं (जैसे हरियाणा/महाराष्ट्र vs केरल)।
हरियाणा: यहाँ की प्रति व्यक्ति आय केरल से ज्यादा है। (लोग ज्यादा पैसा कमाते हैं)।
केरल: यहाँ आय थोड़ी कम है, लेकिन यहाँ शिशु मृत्यु दर (Infant Mortality Rate) बहुत कम है और साक्षरता दर बहुत ऊंची है।
निष्कर्ष: पैसा सब कुछ नहीं है। केरल इसलिए आगे है क्योंकि वहां सार्वजनिक सुविधाएं (Public Facilities) अच्छी हैं। वहां अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं और स्कूल हैं।
सार्वजनिक सुविधाएं: जेब में रखा पैसा आपको प्रदूषण मुक्त वातावरण नहीं दे सकता और न ही संक्रामक बीमारियों से बचा सकता है, जब तक कि पूरा समाज मिलकर कदम न उठाए।
5. मानव विकास रिपोर्ट (Human Development Report – HDR)
विश्व बैंक सिर्फ ‘आय’ देखता है, लेकिन UNDP (संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम) विकास को मापने के लिए बेहतर तरीका अपनाता है। वह प्रकाशित करता है: मानव विकास सूचकांक (HDI)।
HDI तीन चीजों पर आधारित है:
लोगों का स्वास्थ्य: (जीवन प्रत्याशा – कोई व्यक्ति कितने साल जीता है)।
शिक्षा स्तर: (साक्षरता दर और स्कूल जाने वाले बच्चे)।
प्रति व्यक्ति आय: (जीवन स्तर)।
इस मामले में भारत की रैंकिंग दुनिया में लगभग 130 के आसपास रहती है (यह हर साल बदलती है)। श्रीलंका जैसा छोटा देश भी HDI में भारत से आगे है क्योंकि वहां स्वास्थ्य और शिक्षा बेहतर है।
6. विकास की धारणीयता (Sustainability of Development)
हम जिस तरह से संसाधनों का इस्तेमाल कर रहे हैं, क्या वह भविष्य में भी चल पाएगा?
भूमिगत जल (Groundwater): भारत के कई हिस्सों में (जैसे पंजाब) पानी का स्तर बहुत नीचे गिर गया है क्योंकि हम बरसात से ज्यादा पानी निकाल रहे हैं। यह नवीकरणीय है लेकिन इसका अति-उपयोग हो रहा है।
प्राकृतिक संसाधन (कच्चा तेल): तेल और कोयला अनवीकरण योग्य (Non-renewable) हैं। ये एक बार खत्म हो गए तो दोबारा नहीं मिलेंगे। वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर हम इसी रफ्तार से इस्तेमाल करते रहे, तो 50 साल में तेल खत्म हो जाएगा।
सतत विकास (Sustainable Development): हमें ऐसा विकास करना चाहिए जिससे हमारी आज की जरूरतें पूरी हों, लेकिन आने वाली पीढ़ियों के लिए भी संसाधन बचे रहें। हमें यह धरती अपने पूर्वजों से उत्तराधिकार में नहीं मिली, बल्कि हमने इसे अपने बच्चों से उधार लिया है।