class 10 Science - Important Question & Answers

Chapter 8 – आनुवंशिकता एवं जैव विकास

📌 अध्याय परिचय:

इस अध्याय में हम जानेंगे कि गुण माता-पिता से संतान में कैसे पहुँचते हैं। मेंडल के नियम, प्रमुख एवं अप्रमुख लक्षण, संकरण (Monohybrid & Dihybrid Cross), जीन, गुणसूत्र तथा मानव में लिंग निर्धारण जैसे महत्वपूर्ण विषय इसी अध्याय में शामिल हैं। यह अध्याय बोर्ड परीक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

✅ 4. Quick Revision Table
शब्दअर्थ
जीनगुणों को नियंत्रित करने वाली इकाई
एलीलजीन के विभिन्न रूप
प्रमुख लक्षणजो F1 पीढ़ी में दिखाई देता है
अप्रभावी लक्षणजो F1 में छिप जाता है
संकरणदो भिन्न लक्षण वाले पौधों का क्रॉस

📘 अति लघु उत्तरीय प्रश्न (1 अंक)

Q1.आनुवंशिकी का जनक (Father of Genetics) किसे कहा जाता है?

 उत्तर: ग्रेगर जॉन मेंडल (Gregor Johann Mendel)।

उत्तर: उद्यान मटर (Garden Pea) – Pisum sativum.

उत्तर: जीन DNA का वह क्रियात्मक खंड है जो किसी विशिष्ट लक्षण (Trait) को निर्धारित करता है। यह आनुवंशिकता की इकाई है

उत्तर: 23 जोड़े (कुल 46 गुणसूत्र)। इनमें से 22 जोड़े ऑटोसोम और 1 जोड़ा लिंग गुणसूत्र होता है।

उत्तर: वह लक्षण जो F1 पीढ़ी में अपना प्रभाव दिखाता है (जैसे लंबापन – T), प्रभावी लक्षण कहलाता है।

📘 लघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक)

Q6. उपार्जित (Acquired) और आनुवंशिक (Inherited) लक्षणों में अंतर लिखिए।

उत्तर:

  • उपार्जित लक्षण: वे गुण जो जीव अपने जीवनकाल में अर्जित करता है। ये अगली पीढ़ी में नहीं जाते। (उदा: तैरना सीखना, मांसपेशियों का विकास)।

  • आनुवंशिक लक्षण: वे गुण जो माता-पिता से DNA के माध्यम से बच्चों में आते हैं। (उदा: आँखों का रंग, त्वचा का रंग)।

उत्तर:

  • समयुग्मजी: जब किसी लक्षण के दोनों जीन समान हों (जैसे TT या tt)।

  • विषमयुग्मजी: जब किसी लक्षण के दोनों जीन अलग-अलग हों (जैसे Tt)। इसमें प्रभावी लक्षण ही दिखाई देता है।

उत्तर:

  1. मटर का जीवन चक्र छोटा होता है, जिससे कम समय में कई पीढ़ियों का अध्ययन किया जा सकता है।

  2. इसमें कई स्पष्ट विपरीत लक्षण (Contrasting characters) पाए जाते हैं (जैसे लंबा-बौना, गोल-झुर्रीदार बीज)।

उत्तर:

जीन कोशिका में प्रोटीन संश्लेषण (Protein Synthesis) का निर्देश देते हैं। ये प्रोटीन एंजाइम के रूप में कार्य करते हैं जो हार्मोन बनाते हैं। ये हार्मोन शरीर के लक्षणों (जैसे लंबाई) को नियंत्रित करते हैं।

उत्तर:

नहीं। मनुष्यों में लिंग निर्धारण XX-XY गुणसूत्रों द्वारा होता है, जबकि कुछ सरीसृपों और कीटों में लिंग निर्धारण तापमान या अन्य कारकों पर निर्भर करता है।

📘 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5 अंक) (Long Question Answer)

Q11. मनुष्यों में बच्चे का लिंग निर्धारण (Sex Determination) कैसे होता है? आरेख (Diagram) की सहायता से समझाइए। (यह प्रश्न बोर्ड परीक्षा में सबसे अधिक पूछा जाता है)

उत्तर:

मनुष्यों में लिंग निर्धारण पुरुष के गुणसूत्रों पर निर्भर करता है, न कि महिला के।

  1. गुणसूत्र संरचना:

    • मादा (Female): दोनों लिंग गुणसूत्र समान होते हैं (XX)।

    • नर (Male): लिंग गुणसूत्र असमान होते हैं (XY)।

  2. युग्मक निर्माण:

    • माता से हमेशा X गुणसूत्र वाला अंड (Egg) मिलता है।

    • पिता से या तो X वाला शुक्राणु या Y वाला शुक्राणु मिलता है (50-50% संभावना)।

  3. निषेचन:

    • यदि पिता का X शुक्राणु, माता के X अंड से मिलता है= XX (लड़की)।

    • यदि पिता का Y शुक्राणु, माता के X अंड से मिलता है = XY (लड़का)।

निष्कर्ष: अतः होने वाला बच्चा लड़का होगा या लड़की, यह पूरी तरह से पिता से मिलने वाले गुणसूत्र पर निर्भर करता है।

उत्तर:

जब मेंडल ने एक ही लक्षण के दो विपरीत रूपों (जैसे लंबे और बौने पौधे) के बीच संकरण कराया, तो इसे एक-संकर संकरण कहते हैं।

प्रयोग:

  1. जनक पीढ़ी (P): शुद्ध लंबा (TT) * शुद्ध बौना (tt)।

  2. F1 पीढ़ी: सभी पौधे लंबे (Tt) प्राप्त हुए। (यहाँ बौनापन छिप गया)।

  3. F2 पीढ़ी: जब F1 पौधों में स्व-परागण कराया गया, तो F2 पीढ़ी में लंबे और बौने दोनों पौधे मिले।

    अनुपात (Ratio):

  • फीनोटाइप (देखने में): 3 लंबे : 1 बौना (3:1)।

  • जीनोटाइप (जीन संरचना): 1(TT) : 2(Tt) : 1(tt)

उत्तर:

जब दो अलग-अलग लक्षणों (जैसे बीज का आकार और रंग) की वंशागति का अध्ययन एक साथ किया जाता है, तो एक लक्षण की वंशागति दूसरे लक्षण को प्रभावित नहीं करती। इसे स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम कहते हैं।

प्रयोग: गोल-पीले (RRYY) बीज * झुर्रीदार-हरे (rryy) बीज।

  1. F1 पीढ़ी: सभी पौधे गोल और पीले (RrY) बीज वाले हुए।

  2. F2 पीढ़ी: जब F1 में स्व-परागण कराया गया, तो चार प्रकार के संयोग मिले:

    • गोल-पीले

    • गोल-हरे

    • झुर्रीदार-पीले

    • झुर्रीदार-हरे

      F2 फीनोटाइप अनुपात: 9 : 3 : 3 : 1

उत्तर:

लैंगिक जनन में DNA प्रतिकृति के समय कुछ त्रुटियाँ होने से विभिन्नताएँ आती हैं। ये विभिन्नताएँ किसी प्रजाति (Species) को बदलते पर्यावरण में जीवित रहने में मदद करती हैं। उदाहरण: यदि किसी जल स्रोत का तापमान ग्लोबल वार्मिंग के कारण अचानक बढ़ जाए, तो वहाँ रहने वाले अधिकांश जीवाणु मर जाएंगे। लेकिन अगर कुछ जीवाणुओं में ‘गर्मी बर्दाश्त करने की विभिन्नता’ (Heat resistance variation) होगी, तो वे जीवित बच जाएंगे और अपनी प्रजाति को आगे बढ़ाएंगे। अतः विभिन्नताएँ प्रजाति के समूल विनाश को रोकती हैं।

उत्तर:

  • प्रभावी लक्षण (Dominant Trait): वह लक्षण जो विषमयुग्मजी अवस्था (Tt) में भी खुद को अभिव्यक्त करता है। यह अप्रभावी जीन के प्रभाव को दबा देता है। (जैसे: मटर में लंबापन, बैंगनी फूल)।

  • अप्रभावी लक्षण (Recessive Trait): वह लक्षण जो केवल समयुग्मजी अवस्था (tt) में ही दिखाई देता है। यह प्रभावी जीन की उपस्थिति में छिप जाता है। (जैसे: मटर में बौनापन, सफेद फूल)।

  • F1 पीढ़ी: इसमें हमेशा प्रभावी लक्षण ही दिखाई देता है (प्रभाविता का नियम)।

🎯 परीक्षा दृष्टि से महत्वपूर्ण:
  • मेंडल के नियम (3–5 अंक)

  • मोनोहाइब्रिड क्रॉस (3 अंक)

  • डाइहाइब्रिड क्रॉस (5 अंक)

  • लिंग निर्धारण आरेख सहित (5 अंक – बहुत महत्वपूर्ण)

  • Variation पर आधारित प्रश्न (3 अंक)

🖼️ महत्वपूर्ण आरेख (Exam Diagrams)
  • मानव में लिंग निर्धारण का आरेख

  • मोनोहाइब्रिड क्रॉस (Punnett Square)

  • डाइहाइब्रिड क्रॉस

  • गुणसूत्र (Chromosome Structure)

📝 MCQ अभ्यास प्रश्न
  1. मेंडल ने अपने प्रयोग के लिए कौन सा पौधा चुना?

  2. F2 पीढ़ी में मोनोहाइब्रिड अनुपात क्या होता है?

  3. मनुष्य में पुरुष का गुणसूत्र संयोजन क्या है?

✅ Short Summary

📚 इस अध्याय में मेंडल के नियम, जीन, एलील, लिंग निर्धारण और विविधताओं का अध्ययन किया गया है। बोर्ड परीक्षा में यह अध्याय अत्यंत महत्वपूर्ण है।

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