class 10 Science - Important Question & Answers

Chapter 10: मानव नेत्र तथा रंगबिरंगा संसार

कक्षा 10 विज्ञान का अध्याय 10 “मानव नेत्र तथा रंग-बिरंगा संसार” प्रकाश के गुणों और मानव आँख की संरचना को समझाने वाला एक अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय है।

इस अध्याय में विद्यार्थी यह सीखते हैं कि मानव आँख कैसे कार्य करती है, दृष्टि दोष क्या होते हैं, उनका सुधार कैसे किया जाता है तथा प्रकाश के अपवर्तन, विवर्तन और प्रकीर्णन से जुड़ी प्राकृतिक घटनाएँ जैसे इंद्रधनुष, टिंडल प्रभाव और तारों का टिमटिमाना कैसे उत्पन्न होते हैं।

यह अध्याय बोर्ड परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इस अध्याय से हर वर्ष 4 से 6 अंक तक के प्रश्न पूछे जाते हैं।

परीक्षा में विशेष रूप से निम्न विषयों पर प्रश्न आते हैं:
• मानव नेत्र का नामांकित चित्र
• दृष्टि दोष – मायोपिया, हाइपरमेट्रोपिया
• टिंडल प्रभाव
• इंद्रधनुष का निर्माण
• वायुमंडलीय अपवर्तन

📘 अति लघु उत्तरीय प्रश्न (1 अंक)

Q1. सामान्य दृष्टि के वयस्क के लिए 'सुस्पष्ट दर्शन की अल्पतम दूरी' (Near Point) कितनी होती है?

 उत्तर: 25 सेंटीमीटर (25 cm)।

 

उत्तर: पुतली (Pupil) – (इसे परितारिका/Iris छोटा या बड़ा करती है)।

 उत्तर: क्योंकि अंतरिक्ष में वायुमंडल नहीं है, इसलिए वहाँ प्रकाश का प्रकीर्णन (Scattering) नहीं होता।

उत्तर: प्रकाश का वर्ण-विक्षेपण (Dispersion), अपवर्तन और पूर्ण आंतरिक परावर्तन।

उत्तर: नेत्र लेंस की वक्रता (मोटाई) को बदलना ताकि उसकी फोकस दूरी समायोजित हो सके।

📘 लघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक)

Q6. नेत्र की 'समंजन क्षमता' (Power of Accommodation) से आप क्या समझते हैं?

उत्तर:

नेत्र लेंस की वह क्षमता जिसके कारण वह अपनी फोकस दूरी को समायोजित करके निकट और दूरस्थ वस्तुओं को रेटिना पर फोकसित कर लेता है, समंजन क्षमता कहलाती है।

उत्तर:

लाल रंग का तरंगदैर्ध्य (Wavelength) सबसे अधिक होता है। इसलिए, धुएं या कोहरे में इसका प्रकीर्णन (Scattering) सबसे कम होता है और यह दूर से भी साफ दिखाई देता है।

उत्तर:

  • तारे: ये पृथ्वी से बहुत दूर हैं (प्रकाश के बिंदु स्रोत)। वायुमंडलीय अपवर्तन के कारण इनका प्रकाश पथ बार-बार बदलता है, जिससे ये टिमटिमाते लगते हैं।

  • ग्रह: ये पृथ्वी के बहुत पास हैं (विस्तृत स्रोत)। इनसे आने वाले प्रकाश में परिवर्तन का औसत मान शून्य हो जाता है, इसलिए ये नहीं टिमटिमाते।

उत्तर:

जब व्यक्ति पास की वस्तुओं को तो साफ देख पाता है, लेकिन दूर की वस्तुओं को नहीं देख पाता। इसे दूर करने के लिए उचित क्षमता वाले अवतल लेंस (Concave Lens) का उपयोग किया जाता है।

उत्तर:

जब प्रकाश किसी कोलाइडल माध्यम (जैसे धुआं, धूल) से गुजरता है, तो कणों द्वारा प्रकाश का प्रकीर्णन हो जाता है जिससे प्रकाश का मार्ग दिखाई देने लगता है। उदाहरण: किसी अंधेरे कमरे में छोटे छिद्र से आते हुए सूर्य के प्रकाश का मार्ग दिखना।

📘 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5 अंक) (Long Question Answer)

Q11. मानव नेत्र का नामांकित चित्र बनाइए तथा इसके प्रमुख भागों (कॉर्निया, परितारिका, पुतली, रेटिना) के कार्य लिखिए।

उत्तर:

(1) चित्र: (यहाँ मानव नेत्र का चित्र बनेगा)। (2) प्रमुख भागों के कार्य:

  • स्वच्छ मण्डल (Cornea): प्रकाश नेत्र में यहीं से प्रवेश करता है।

  • परितारिका (Iris): यह पुतली के आकार को नियंत्रित करती है (गहरा रंग वाला पेशीय डायाफ्राम)।

  • पुतली (Pupil): यह आँख में जाने वाले प्रकाश की मात्रा को नियंत्रित करती है।

  • अभिनेत्र लेंस (Eye Lens): यह वस्तुओं का उल्टा तथा वास्तविक प्रतिबिंब रेटिना पर बनाता है।

  • दृष्टिपटल (Retina): यह एक पर्दा है जिस पर प्रतिबिंब बनता है। इसमें प्रकाश-सुग्राही कोशिकाएं होती हैं।

उत्तर:

निकट दृष्टि दोष: वह दोष जिसमें व्यक्ति दूर की वस्तुओं को स्पष्ट नहीं देख पाता क्योंकि प्रतिबिंब रेटिना के सामने (पहले) बन जाता है। कारण:

    1. अभिनेत्र लेंस की वक्रता का अत्यधिक होना (लेंस मोटा हो जाना)।

    2. नेत्र गोलक (Eye ball) का लंबा हो जाना। निवारण: इस दोष को संशोधित करने के लिए अवतल लेंस (Concave lens) का उपयोग किया जाता है जो प्रकाश को अपसरित (Diverge) करके प्रतिबिंब को वापस रेटिना पर बनाता है।

उत्तर:

दीर्घ दृष्टि दोष: वह दोष जिसमें व्यक्ति पास की वस्तुओं को स्पष्ट नहीं देख पाता क्योंकि प्रतिबिंब रेटिना के पीछे बनता है। कारण:

  1. अभिनेत्र लेंस की फोकस दूरी का बढ़ जाना (लेंस पतला हो जाना)।

  2. नेत्र गोलक का छोटा हो जाना। निवारण: इस दोष को संशोधित करने के लिए उत्तल लेंस (Convex lens) का उपयोग किया जाता है जो प्रकाश को अभिसरित (Converge) करके प्रतिबिंब को रेटिना पर ले आता है।

उत्तर:

विक्षेपण: जब श्वेत प्रकाश (सूर्य का प्रकाश) किसी प्रिज्म से गुजरता है, तो वह अपने सात अवयवी रंगों में विभक्त हो जाता है। इस घटना को विक्षेपण कहते हैं। कारण: अलग-अलग रंगों का प्रकाश कांच में अलग-अलग चाल से चलता है और अलग-अलग कोण पर मुड़ता है। रंगों का क्रम (VIBGYOR): नीचे से ऊपर की ओर: बैंगनी (Violet), जामुनी (Indigo), नीला (Blue), हरा (Green), पीला (Yellow), नारंगी (Orange), लाल (Red)।

  • लाल प्रकाश सबसे कम मुड़ता है, बैंगनी सबसे अधिक।

उत्तर:

वायुमंडलीय अपवर्तन: पृथ्वी के वायुमंडल में गर्म और ठंडी हवा की परतें होती हैं जिनका अपवर्तनांक (घनत्व) अलग-अलग होता है। जब प्रकाश इन परतों से गुजरता है तो वह अपने मार्ग से विचलित हो जाता है। (क) सूर्योदय/सूर्यास्त: सूर्य क्षितिज (Horizon) से नीचे होने पर भी हमें 2 मिनट पहले दिखाई देने लगता है (अग्रिम सूर्योदय) और डूबने के 2 मिनट बाद तक दिखाई देता रहता है। यह प्रकाश के मुड़ने के कारण होता है। (ख) तारों का टिमटिमाना: तारों से आने वाला प्रकाश वायुमंडल की हिलती-डुलती परतों से होकर आता है, जिससे प्रकाश का मार्ग निरंतर बदलता रहता है और तारे की आभासी स्थिति बदलती रहती है, जिसे हम टिमटिमाना कहते हैं।

• मानव नेत्र का चित्र हमेशा साफ और नामांकित बनाएँ
• दृष्टि दोष वाले प्रश्नों में किरण आरेख अवश्य बनाएँ
• इंद्रधनुष वाले प्रश्नों में रंगों का सही क्रम लिखें
• परिभाषात्मक प्रश्नों में शब्दों की शुद्धता रखें

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