कक्षा 10 हिंदी महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर
पाठ 4 - 'अट नहीं रही है'
नमस्ते विद्यार्थियों! ‘उत्साह’ के बाद इसी पाठ में निराला जी की एक और बहुत ही सुंदर कविता है— ‘अट नहीं रही है’। इस कविता में कवि ने फागुन (Phagun) महीने की मादक सुंदरता का वर्णन किया है। फागुन यानी वह समय जब वसंत ऋतु (Spring Season) अपने चरम पर होती है।
कवि को प्रकृति की सुंदरता इतनी ज्यादा लग रही है कि वह उनकी आँखों में और वातावरण में समा नहीं पा रही है। बोर्ड परीक्षा के लिए इस कविता से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न नीचे दिए गए हैं।
Q1. “अट नहीं रही है” कविता का मूल भाव (Theme) क्या है?
उत्तर: इस कविता का मूल भाव ‘फागुन की सुंदरता’ का वर्णन करना है। कवि निराला जी प्रकृति प्रेमी थे। वे देखते हैं कि फागुन के महीने में प्रकृति इतनी सुंदर हो गई है कि उसकी शोभा धरती पर समा नहीं पा रही है (अट नहीं रही है)। चारों तरफ रंग-बिरंगे फूल खिले हैं, नए पत्ते आ गए हैं और हवा में खुशबू फैली हुई है। यह सुंदरता इतनी व्यापक है कि यह घर-घर में और लोगों के मन में भर गई है। कवि कहना चाहते हैं कि जब प्रकृति खुश होती है, तो उसका असर हर जगह दिखाई देता है और मनुष्य का मन भी खुशी से झूम उठता है।
Q2. कवि की आँख फागुन की सुंदरता से क्यों नहीं हट रही है?
उत्तर: फागुन के महीने में प्रकृति का रूप इतना मोहक और आकर्षक हो गया है कि कवि उस पर मोहित हो गए हैं। चारों तरफ हरियाली, लाल-हरे पत्ते और रंग-बिरंगे फूलों की बहार है। यह दृश्य इतना जादुई है कि कवि चाहकर भी अपनी नज़रें इससे हटा नहीं पा रहे हैं। जैसे कोई बहुत सुंदर चीज़ देखने पर हम उसे एकटक देखते रह जाते हैं, वैसे ही कवि की हालत हो गई है। वे प्रकृति के इस रूप को पी लेना चाहते हैं। उनकी आँखें इस सुंदरता के जाल में बंध गई हैं, इसलिए कोशिश करने पर भी वे अपनी पलकें नहीं झपका पा रहे हैं।
Q3. “कहीं साँस लेते हो, घर-घर भर देते हो” — इस पंक्ति के माध्यम से कवि क्या कहना चाहते हैं?
उत्तर: यहाँ कवि ने फागुन का मानवीकरण (Personification) किया है, यानी उसे एक जीवित इंसान की तरह दिखाया है। ‘साँस लेने’ का अर्थ है— हवा का चलना। फागुन के महीने में जब हवा चलती है, तो वह फूलों की महक को अपने साथ उड़ाकर ले जाती है। कवि कल्पना करते हैं कि जैसे फागुन साँस ले रहा है और उसकी साँस (सुगंधित हवा) से हर घर महक उठा है। यह खुशबू सिर्फ घरों में ही नहीं, बल्कि लोगों के दिलों में भी भर गई है, जिससे वातावरण बहुत ही मादक और खुशनुमा हो गया है।
Q4. फागुन में ऐसा क्या होता है जो बाकी ऋतुओं से भिन्न है?
उत्तर: फागुन (वसंत ऋतु) को ‘ऋतुराज’ कहा जाता है, यानी सभी ऋतुओं का राजा। इसमें कुछ खास बातें होती हैं जो इसे बाकी मौसमों से अलग बनाती हैं:
मौसम का संतुलन: इस समय न तो सर्दी की ठिठुरन होती है और न ही गर्मी की तपन। मौसम बहुत सुहावना होता है।
प्राकृतिक सौंदर्य: पेड़ों पर पुरानी पत्तियां झड़ जाती हैं और नई कोमल (किसलय) पत्तियां आ जाती हैं। चारों तरफ फूल ही फूल दिखाई देते हैं, जबकि पतझड़ या गर्मी में ऐसा नहीं होता।
उल्लास: इस महीने में वातावरण में एक अलग ही नशा और मस्ती होती है। होली का त्यौहार भी इसी समय आता है, जिससे चारों तरफ रंग और खुशी का माहौल होता है।
Q5. “उड़ने को नभ में तुम, पर-पर कर देते हो” — इसका आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: इस पंक्ति के दो अर्थ निकलते हैं:
पक्षियों के संदर्भ में: फागुन का मौसम इतना सुहावना है कि पक्षी खुशी से आसमान में पंख (पर) फैलाकर उड़ने लगते हैं।
मनुष्य के मन के संदर्भ में: यह मौसम लोगों के मन को इतना हल्का और खुश कर देता है कि उनका मन भी कल्पना के आकाश में उड़ने को बेताब हो जाता है। कवि को लगता है कि फागुन ने लोगों के मन को पंख लगा दिए हैं, जिससे वे सारी चिंताएं भूलकर उत्साह और उमंग से भर गए हैं। यह प्रकृति के जादुई असर को दिखाता है।
Q6. कविता में ‘पत्तों से लदी डाल’ का वर्णन किस प्रकार किया गया है?
उत्तर: कवि निराला जी ने फागुन में पेड़ों की शोभा का बहुत ही सजीव चित्रण किया है। वे कहते हैं कि पेड़ों की डालियाँ नए पत्तों से लद गई हैं। ये पत्तियां कहीं हरी हैं तो कहीं लाल (नई कोमल पत्तियां अक्सर लाल रंग की होती हैं)। ऐसा लगता है मानो प्रकृति ने अपने गले में रंग-बिरंगे फूलों की माला पहन ली हो। पेड़ों के बीच से आती हुई भीनी-भीनी खुशबू ऐसी लग रही है जैसे प्रकृति के हृदय से सुगंध फूट रही हो। यह दृश्य इतना सुंदर है कि “पट नहीं रही है” यानी यह सुंदरता समा नहीं पा रही है, बाहर छलक रही है।
एग्जाम टिप (Pro Tip): इस कविता के उत्तर लिखते समय ‘मानवीकरण अलंकार’ (Personification) शब्द का प्रयोग ज़रूर करें, क्योंकि कवि ने फागुन को एक इंसान की तरह साँस लेते और उड़ते हुए दिखाया है। साथ ही, ‘फागुन’ और ‘वसंत’ दोनों शब्दों का मतलब एक ही संदर्भ में समझें।
शुभकामनाएं!