कक्षा 10 हिंदी महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर
पाठ 5 - यह दंतुरित मुसकान - नागार्जुन
नमस्ते विद्यार्थियों! हिंदी (क्षितिज भाग-2) के पांचवें अध्याय में आपका स्वागत है। इस कविता के रचयिता जनवादी कवि नागार्जुन हैं। इस कविता में कवि ने एक छोटे बच्चे की मनमोहक मुसकान का वर्णन किया है जिसके अभी-अभी नए दाँत (Milk Teeth) निकले हैं।
कवि बहुत दिनों बाद अपने घर लौटे हैं और जब वे अपने बच्चे की उस भोली और निश्छल मुसकान को देखते हैं, तो उनका मन खुशी से भर जाता है। उन्हें लगता है कि बच्चे की यह मुसकान इतनी शक्तिशाली है कि यह किसी पत्थर दिल इंसान को भी पिघला सकती है। आइए, बोर्ड एग्जाम के लिए इसके सबसे महत्वपूर्ण प्रश्नों को देखते हैं।
Q1. “मृतक में भी डाल देगा जान” — इस पंक्ति के माध्यम से कवि बच्चे की मुसकान के बारे में क्या कहना चाहते हैं?
उत्तर: कवि नागार्जुन का मानना है कि एक नन्हे बच्चे की मुसकान में अद्भुत शक्ति होती है। ‘मृतक’ का यहाँ अर्थ कोई मरा हुआ व्यक्ति नहीं, बल्कि ऐसा इंसान है जो जीवन से निराश, हताश और उदास हो चुका है। जिसके जीवन में कोई खुशी या रस नहीं बचा है। कवि कहते हैं कि जब ऐसा निराश व्यक्ति भी बच्चे की ‘दंतुरित मुसकान’ (नन्हे दाँतों वाली हँसी) को देखता है, तो उसके भीतर जीने की इच्छा फिर से जाग उठती है। बच्चे की मासूमियत उसे अपने सारे गम भुलाने पर मजबूर कर देती है। यह मुसकान इतनी सजीव और प्रभावशाली है कि यह एक नीरस और सूखे हुए मन में भी प्राण फूँक सकती है, यानी उसे खुशी से भर सकती है।
Q2. “छोड़कर तालाब मेरी झोपड़ी में खिल रहे जलजात” — इस पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: ‘जलजात’ का अर्थ है— कमल का फूल। कमल आमतौर पर तालाब के पानी में खिलता है। लेकिन यहाँ कवि ने अपने धूल से सने हुए (धूलि-धूसर) बच्चे की तुलना ‘कमल’ से की है। बच्चा खेलते हुए धूल में सन गया है और जब वह कवि की साधारण सी झोपड़ी में आता है, तो कवि को लगता है कि साक्षात कमल का फूल तालाब छोड़कर उनके घर में खिल गया है। भाव यह है कि बच्चे का धूल से भरा हुआ शरीर भी कवि को बहुत सुंदर और पवित्र लग रहा है। बच्चे के आने से उनकी गरीब और सूनी झोपड़ी में भी रौनक और खुशहाली आ गई है। यह पंक्ति पिता के वात्सल्य प्रेम और बच्चे की सुंदरता को दर्शाती है।
Q3. बच्चे के स्पर्श को लेकर कवि ने क्या कल्पना की है? (पाषाण और शेफालिका का उदाहरण)
उत्तर: कवि को बच्चे का स्पर्श (Touch) इतना कोमल और जादुई लगता है कि वे दो बड़ी कल्पनाएं करते हैं:
पत्थर का पिघलना: वे कहते हैं कि “पिघलकर जल बन गया होगा कठिन पाषाण”। यानी बच्चे का स्पर्श पाकर कठोर पत्थर भी पिघलकर पानी बन गया होगा। सांकेतिक अर्थ यह है कि बच्चे को छूने से कठोर से कठोर हृदय वाला व्यक्ति भी भावुक और कोमल हो जाता है।
फूलों का झड़ना: कवि कहते हैं कि बबूल या बाँस जैसे सूखे और कांटेदार पेड़ों से भी ‘शेफालिका’ के फूल झड़ने लगे होंगे। इसका मतलब है कि बच्चे के संपर्क में आने से रूखा और नीरस व्यक्ति भी प्रेम और आनंद से भर जाता है।
Q4. कवि ने बच्चे की मुसकान के लिए माँ को माध्यम क्यों माना है? “धन्य तुम, माँ भी तुम्हारी धन्य” — ऐसा क्यों कहा?
उत्तर: कवि घुमक्कड़ स्वभाव के थे और लंबे समय तक घर से बाहर (प्रवासी) रहते थे। इसलिए जब वे वापस आए, तो बच्चा उन्हें पहचान नहीं पाया। बच्चा अपनी माँ की गोद में था और माँ के कारण ही कवि उस बच्चे को देख पाए। अगर माँ न होती, तो न तो बच्चे का जन्म होता और न ही कवि को उसकी यह मनमोहक मुसकान देखने को मिलती। माँ ही वह कड़ी है जिसने पिता और बच्चे को मिलाया है। माँ ने ही बच्चे को पाला-पोसा और उसे संस्कार दिए। इसलिए कवि कृतज्ञता (Gratitude) व्यक्त करते हुए कहते हैं कि तुम (बच्चा) भी धन्य हो और तुम्हारी माँ भी धन्य है जिसने तुम्हें जन्म दिया और मुझे यह सुख दिया।
Q5. बच्चा कवि को किस तरह देख रहा है और वह कब मुसकाता है?
उत्तर: चूंकि कवि बहुत दिनों बाद घर लौटे हैं, इसलिए बच्चा उन्हें पहचान नहीं रहा है। वह उन्हें एक अजनबी (Stranger) समझ रहा है।
तिरछी नज़रों से देखना: बच्चा कवि को लगातार नहीं देख रहा, बल्कि बीच-बीच में कनखियों (तिरछी नज़रों) से देख रहा है। वह हैरानी और जिज्ञासा के साथ उन्हें पहचानने की कोशिश कर रहा है।
मुसकाना: जब कवि और बच्चे की आँखें मिलती हैं (आँखें चार होना), तो बच्चा शर्म या संकोच में मुसका देता है। यही वह पल है जब उसके छोटे-छोटे नए दाँत दिखाई देते हैं और कवि का दिल जीत लेते हैं। यह मुसकान कवि को बहुत ही प्यारी (छविमान) लगती है।
Q6. “अनिमेष देखना” और “आँखें फेर लेना” में क्या अंतर है?
उत्तर: कविता में बच्चे के देखने के दो तरीकों का वर्णन है:
अनिमेष देखना: जब बच्चा पहली बार किसी अजनबी (कवि) को देखता है, तो वह उसे बिना पलक झपकाए लगातार (अनिमेष) देखता रहता है। वह यह समझने की कोशिश करता है कि यह व्यक्ति कौन है। इसमें जिज्ञासा और भोलापन है।
आँखें फेर लेना: कवि को लगता है कि बच्चा लगातार देखते हुए थक गया है। इसलिए कवि कहते हैं कि “क्या हुआ यदि हो सके परिचित न पहली बार?” और वे खुद ही अपनी नज़रें हटा लेने की बात सोचते हैं ताकि बच्चे को लगातार ऊपर देखने का कष्ट न हो। यह कवि का बच्चे के प्रति स्नेह और परवाह दिखाता है।
Q7. ‘फसल’ कविता के अनुसार, फसल क्या है? (संक्षिप्त प्रश्न)
उत्तर: (नोट: यह प्रश्न इसी अध्याय की दूसरी कविता से है जो अक्सर साथ में पूछा जाता है।) कवि नागार्जुन के अनुसार, ‘फसल’ केवल अनाज का ढेर नहीं है, बल्कि यह प्रकृति और मनुष्य के सहयोग का परिणाम है। फसल पैदा करने में कई चीज़ों का योगदान होता है:
नदियों का जादुई पानी।
लाखों किसानों के हाथों का स्पर्श और मेहनत।
अलग-अलग तरह की मिट्टी के गुण।
सूरज की किरणें (जो भोजन बनाने में मदद करती हैं)।
और हवा की थिरकन। इन सबके मिलने से ही फसल तैयार होती है। कवि यह बताना चाहते हैं कि हम प्रकृति और एक-दूसरे के बिना कुछ भी पैदा नहीं कर सकते।
Q8. नागार्जुन की भाषा-शैली की किन्हीं दो विशेषताओं का उल्लेख करें।
उत्तर: इस कविता में नागार्जुन की भाषा बहुत ही सहज और प्रभावपूर्ण है:
तत्सम और तद्भव का मेल: उन्होंने ‘दंतुरित’, ‘जलजात’, ‘पाषाण’ जैसे संस्कृत निष्ठ (तत्सम) शब्दों के साथ-साथ आम बोलचाल की हिंदी का भी सुंदर प्रयोग किया है।
बिंब विधान (Imagery): कविता पढ़ते समय हमारी आँखों के सामने चित्र उभरने लगते हैं। जैसे— धूल से सना बच्चा (कमल जैसा), पत्थर का पिघलना, या बच्चे का तिरछी नज़रों से देखना। यह ‘दृश्य बिंब’ का बेहतरीन उदाहरण है।
एग्जाम टिप (Pro Tip): इस पाठ से ‘आशय स्पष्ट कीजिए’ (Explain the meaning) वाले प्रश्न बहुत आते हैं। खासकर इन पंक्तियों को अच्छे से तैयार करें:
“पिघलकर जल बन गया होगा कठिन पाषाण”
“छू गया तुमसे कि झरने लग पड़े शेफालिका के फूल”
अगर आप उत्तर में यह लिखेंगे कि “कवि ने बच्चे की मुसकान को जीवन रक्षक और संजीवनी शक्ति के रूप में चित्रित किया है”, तो परीक्षक (Examiner) पर बहुत अच्छा प्रभाव पड़ेगा।
शुभकामनाएं!