class 10 Hindi - Notes
Chapter 4 - अट नहीं रही है
1. संदर्भ
इस कविता में फागुन (Phagun/Spring) महीने की सुंदरता का वर्णन है। होली के समय वाला यह मौसम इतना सुंदर है कि उसकी शोभा समा नहीं पा रही है।
2. कविता का सारांश
“अट नहीं रही है” – फागुन की चमक और सुंदरता इतनी ज्यादा है कि वह प्रकृति में और कवि के मन में समा (Fit) नहीं पा रही है। वह बाहर छलक रही है।
“कहीं साँस लेते हो, घर-घर भर देते हो” – बसंत ऋतु में जब हवा चलती है, तो ऐसा लगता है प्रकृति साँस ले रही है और फूलों की खुशबू से हर घर महक उठता है।
“हटना भी चाहता हूँ तो आँख नहीं हटती” – नजारा इतना खूबसूरत है कि कवि अपनी नजर हटाना चाहते हैं, पर हटा नहीं पा रहे।
पेड़-पौधे: पेड़ों पर नए लाल और हरे पत्ते आ गए हैं। ऐसा लगता है प्रकृति ने फूलों की माला पहन ली है।
3. महत्वपूर्ण शब्दार्थ (Key Word Meanings)
निदाघ: भीषण गर्मी (Heat).
वज्र: कठोर/बिजली (Thunderbolt).
अट: समाना (To fit in).
पाट-पाट: जगह-जगह।
पुष्प-माल: फूलों की माला।