class 10 Civics - Notes

Chapter 4 - जाति, धर्म और लैंगिक मसले" (Gender, Religion and Caste)

1. लैंगिक मसले और राजनीति (Gender and Politics)

लैंगिक असमानता प्राकृतिक नहीं, बल्कि सामाजिक है। यह ‘श्रम के लैंगिक विभाजन’ पर आधारित है।

  • श्रम का लैंगिक विभाजन (Sexual Division of Labour): यह माना जाता है कि घर का काम (खाना बनाना, सफाई) औरतें करेंगी और बाहर का काम मर्द।

  • नारीवादी आंदोलन (Feminist Movements): वे औरतें और मर्द जो मानते हैं कि पुरुषों और महिलाओं को समान अधिकार मिलने चाहिए। इनकी मांगों के कारण आज महिलाएं वैज्ञानिक, डॉक्टर और नेता बन पा रही हैं।

महिलाओं की स्थिति (भारत में):

  1. साक्षरता दर: पुरुषों की 76% है, जबकि महिलाओं की केवल 54% है।

  2. समान वेतन: कानून (Equal Remuneration Act 1976) होने के बावजूद, महिलाओं को पुरुषों की तुलना में कम वेतन मिलता है।

  3. बाल लिंग अनुपात: भारत के कई हिस्सों में लड़कियों को जन्म से पहले ही मार दिया जाता है (भ्रूण हत्या)।

राजनीतिक प्रतिनिधित्व:

  • भारत की विधायिका (संसद) में महिलाओं की संख्या बहुत कम है (लोकसभा में 14.36% के आसपास)।

  • पंचायती राज ने इसे सुधारा है: स्थानीय सरकारों में महिलाओं के लिए एक-तिहाई (33%) सीटें आरक्षित हैं, जिससे 10 लाख से ज्यादा महिलाएं प्रतिनिधि बनी हैं।

2. धर्म, सांप्रदायिकता और राजनीति (Religion, Communalism and Politics)

गांधीजी कहते थे: “धर्म को राजनीति से कभी अलग नहीं किया जा सकता।” उनका मतलब नैतिक मूल्यों से था।

  • सांप्रदायिकता (Communalism): जब एक धर्म के लोग खुद को दूसरों से श्रेष्ठ समझने लगते हैं और मानते हैं कि अलग धर्म के लोग एक राष्ट्र में समान नागरिक बनकर नहीं रह सकते।

  • सांप्रदायिक राजनीति के रूप:

    1. धार्मिक पूर्वाग्रह (Stereotypes)।

    2. धर्म के आधार पर वोट मांगना।

    3. दंगे और हिंसा (जैसे भारत-पाक बंटवारे के समय)।

धर्मनिरपेक्ष शासन (Secular State – भारत): भारत ने सांप्रदायिकता से लड़ने के लिए ‘धर्मनिरपेक्षता’ को चुना:

  1. भारत का कोई राजकीय धर्म (Official Religion) नहीं है (जैसे पाकिस्तान का इस्लाम है)।

  2. सभी को अपना धर्म मानने और प्रचार करने की आजादी है।

  3. संविधान धर्म के आधार पर भेदभाव की मनाही करता है।

3. जाति और राजनीति (Caste and Politics)

जाति व्यवस्था भारत की एक विशेष समस्या है।

  • जाति और राजनीति:

    1. पार्टियां उम्मीदवार चुनते समय उस क्षेत्र की जाति का ध्यान रखती हैं।

    2. सरकार बनाते समय अलग-अलग जातियों को जगह दी जाती है।

    3. कोई भी एक जाति अपने दम पर चुनाव नहीं जीत सकती, उसे दूसरों का साथ चाहिए।

  • जाति के अंदर राजनीति: सिर्फ राजनीति ही जाति को प्रभावित नहीं करती, जाति भी राजनीति से प्रभावित होती है:

    1. हर जाति खुद को बड़ा बनाना चाहती है और अपनी उप-जातियों को साथ मिला लेती है।

    2. नई तरह की जातियां बन गई हैं: जैसे ‘अगड़ा’ और ‘पिछड़ा’

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