class 10 Geography - Notes
Chapter 4 - कृषि (Agriculture)
1. कृषि के प्रकार (Types of Farming)
भारत में खेती मुख्य रूप से तीन तरीकों से की जाती है:
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प्रारंभिक जीविका निर्वाह कृषि (Primitive Subsistence Farming):
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यह जमीन के छोटे टुकड़ों पर पुराने औजारों (लकड़ी के हल, डाओ) और परिवार की मदद से की जाती है।
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कर्तन दहन प्रणाली (Slash and Burn / Jhuming): किसान जमीन के एक टुकड़े को साफ करके अनाज उगाते हैं। जब मिट्टी की उर्वरता कम हो जाती है, तो वे जगह बदल लेते हैं। इसे असम/मेघालय में ‘झूम’ और छत्तीसगढ़/अंडमान में ‘दीपा’ कहते हैं।
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गहन जीविका कृषि (Intensive Subsistence Farming):
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यह उन इलाकों में होती है जहाँ जनसंख्या का दबाव अधिक है।
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इसमें अधिक उत्पादन के लिए रासायनिक खादों और सिंचाई का ज्यादा इस्तेमाल होता है।
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वाणिज्यिक कृषि (Commercial Farming):
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इसका मुख्य उद्देश्य फसल बेचकर लाभ कमाना है।
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इसमें HYV बीज, रासायनिक उर्वरक और कीटनाशकों का प्रयोग होता है।
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रोपण कृषि (Plantation): यह भी वाणिज्यिक खेती है जहाँ एक बड़े क्षेत्र में एक ही फसल उगाई जाती है (जैसे- चाय, कॉफी, रबड़, गन्ना, केला)।
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2. शस्य प्रारूप/फसल ऋतुएँ (Cropping Pattern)
भारत में तीन फसल ऋतुएँ हैं:
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रबी (Rabi):
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बुवाई: शीत ऋतु (अक्टूबर-दिसंबर)। कटाई: ग्रीष्म ऋतु (अप्रैल-जून)।
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फसलें: गेहूँ, जौ, मटर, चना, सरसों।
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खरीफ (Kharif):
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बुवाई: मानसून के आगमन पर (जून-जुलाई)। कटाई: सितंबर-अक्टूबर।
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फसलें: चावल (धान), मक्का, ज्वार, बाजरा, अरहर, मूंग, उड़द, कपास, जूट, मूंगफली।
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ज़ायद (Zaid):
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यह रबी और खरीफ के बीच का छोटा मौसम है (गर्मी में)।
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फसलें: तरबूज, खरबूजा, खीरा, सब्जियां, चारा।
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3. मुख्य फसलें (Major Crops)
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चावल (Rice):
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भारत का मुख्य भोजन। चीन के बाद भारत दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक।
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जरूरत: उच्च तापमान (25°C+), अधिक वर्षा (100cm+)।
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क्षेत्र: प. बंगाल, यूपी, पंजाब (नहर सिंचाई से)।
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गेहूँ (Wheat):
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उत्तर भारत का मुख्य भोजन।
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जरूरत: ठंडी जलवायु और पकते समय खिली धूप। 50-75cm वर्षा।
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क्षेत्र: पंजाब, हरियाणा, यूपी, एमपी।
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मोटे अनाज (Millets):
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इन्हें पोषक तत्वों का खजाना कहते हैं।
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ज्वार: वर्षा पर निर्भर (महाराष्ट्र)। बाजरा: बलुआ मिट्टी (राजस्थान)। रागी: लोहा/कैल्शियम से भरपूर (कर्नाटक)।
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दालें (Pulses):
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भारत सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता है। ये प्रोटीन का स्रोत हैं और जमीन को नाइट्रोजन देकर उपजाऊ बनाती हैं (अरहर को छोड़कर)।
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गन्ना (Sugarcane):
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गर्म और आर्द्र जलवायु। भारत ब्राजील के बाद दूसरे नंबर पर है। (यूपी, महाराष्ट्र)।
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4. अखाद्य फसलें (Non-Food Crops)
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रबड़: भूमध्यरेखीय फसल है। इसके लिए 200cm से ज्यादा बारिश चाहिए। (केरल)।
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कपास (Cotton): इसे काली मिट्टी चाहिए। पकने के लिए 210 पाला-रहित दिन (Frost-free days) और खिली धूप जरूरी है।
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जूट (Jute): इसे ‘सुनहरा रेशा’ (Golden Fiber) कहते हैं। इसका उपयोग बोरे, चटाई बनाने में होता है। (पश्चिम बंगाल)।
5. प्रौद्योगिकी और संस्थागत सुधार (Technological & Institutional Reforms)
आजादी के बाद खेती सुधारने के लिए कई कदम उठाए गए:
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हरित क्रांति (Green Revolution): अधिक उपज वाले बीजों (HYV) और तकनीक से अनाज (गेहूं-चावल) का उत्पादन बढ़ाना।
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श्वेत क्रांति (White Revolution): दूध उत्पादन बढ़ाना (Operation Flood)।
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भूदान-ग्रामदान (Bhoodan-Gramdan): विनोबा भावे द्वारा शुरू किया गया। इसे ‘रक्तहीन क्रांति’ (Bloodless Revolution) कहते हैं। अमीरों ने अपनी जमीन भूमिहीन किसानों को दान दी।
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किसानों के लिए सुविधाएं:
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KCC (किसान क्रेडिट कार्ड)।
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PAIS (पास्कल दुर्घटना बीमा योजना)।
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न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP)।
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