class 10 History - Notes
Chapter 5 - मुद्रण संस्कृति और आधुनिक दुनिया (Print Culture and the Modern World)
1. शुरुआती छपी हुई किताबें (The First Printed Books)
प्रिंट तकनीक सबसे पहले चीन (China), जापान और कोरिया में विकसित हुई।
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Woodblock Printing (काठ की तख्ती वाली छपाई): चीन में 594 ई. से स्याही लगे काठ (लकड़ी) के ब्लॉक को कागज पर रगड़कर किताबें छापी जाती थीं।
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Accordion Book: चीनी कागज बहुत पतला होता था, इसलिए उसे एक तरफ छापकर मोड़ा जाता था और सिला जाता था।
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Japan: जापान की सबसे पुरानी किताब ‘Diamond Sutra’ (868 ई.) है।
2. यूरोप में प्रिंट का आना (Print Comes to Europe)
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Marco Polo: 1295 में मार्को पोलो चीन से इटली वापस आया और अपने साथ ‘Woodblock Printing’ का ज्ञान लाया।
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Gutenberg & The Printing Press:
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जर्मनी के योहान गुटेनबर्ग (Johann Gutenberg) ने 1430 के दशक में पहली प्रिंटिंग प्रेस विकसित की। उसे यह आइडिया ‘जैतून (Olive) और अंगूर पेरने वाली मशीनों’ से आया।
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First Book: उसने जो पहली किताब छापी वो ‘Bible’ थी। इसकी 180 प्रतियां (Copies) बनाने में 3 साल लगे (जो उस समय के हिसाब से बहुत तेज था)।
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3. मुद्रण क्रांति (The Print Revolution)
प्रिंटिंग सिर्फ एक नई तकनीक नहीं थी, इसने लोगों की जिंदगी बदल दी।
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Reading Mania: पहले किताबें महँगी थीं, अब सस्ती हो गईं। पहले लोग सिर्फ ‘सुनते’ थे (Oral culture), अब ‘पढ़ने’ लगे (Reading culture)।
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Religious Debates (धार्मिक बहस): 1517 में धर्म सुधारक मार्टिन लूथर (Martin Luther) ने कैथोलिक चर्च की बुराइयों के खिलाफ ’95 Theses’ लिखीं और चर्च के दरवाजे पर टांग दीं।
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इसके कारण चर्च में विभाजन हुआ और ‘Protestant Reformation’ (प्रोटेस्टेंट धर्म सुधार) की शुरुआत हुई।
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लूथर ने कहा था: “मुद्रण ईश्वर की दी हुई महानतम देन है” (Printing is the ultimate gift of God).
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4. भारत में मुद्रण (India and the World of Print)
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पांडुलिपियां (Manuscripts): प्रिंट से पहले भारत में ताड़ के पत्तों (Palm leaves) या हाथ से बने कागज पर पुरानी पांडुलिपियां लिखी जाती थीं। ये बहुत नाजुक और महँगी होती थीं।
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Print Comes to India:
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प्रिंटिंग प्रेस भारत में सबसे पहले गोवा में पुर्तगाली धर्म प्रचारकों (Missionaries) के साथ आई (16वीं सदी के मध्य में)।
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जेम्स ऑगस्टस हिक्की ने 1780 में ‘Bengal Gazette’ शुरू किया। यह एक साप्ताहिक पत्रिका थी। उसने इसमें कंपनी के अधिकारियों की गपशप छापी, जिससे गवर्नर जनरल वारेन हेस्टिंग्स नाराज हो गए।
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5. धार्मिक सुधार और सार्वजनिक बहस (Religious Reform and Public Debates)
19वीं सदी में भारत में धर्म सुधारकों ने प्रिंट का इस्तेमाल समाज को जागरूक करने के लिए किया।
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राजा राममोहन राय: उन्होंने 1821 में ‘संवाद कौमुदी’ (Sambad Kaumudi) प्रकाशित की। इसके विरोध में रूढ़िवादी हिंदुओं ने ‘समाचार चंद्रिका’ शुरू की।
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इस्लाम: उत्तर भारत के उलेमाओं ने मुस्लिम कानून समझाने के लिए हजारों ‘फतवे’ छापे। देवबंद सेमिनरी (Deoband Seminary) की स्थापना 1867 में हुई।
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Ramcharitmanas: तुलसीदास की रामचरितमानस का पहला प्रिंटेड एडिशन 1810 में कलकत्ता से आया।
6. प्रकाशन के नए रूप (New Forms of Publication)
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उपन्यास (Novels): भारतीय लोग अपनी भाषा में कहानियां पढ़ना पसंद करने लगे।
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Visual Culture: राजा रवि वर्मा (Raja Ravi Varma) ने आम लोगों के लिए देवी-देवताओं की तस्वीरें बनाईं। अब गरीब लोग भी अपने घरों में भगवान की फोटो लगा सकते थे।
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Caricatures (व्यंग्य चित्र): अंग्रेजों के पश्चिमी तौर-तरीकों का मजाक उड़ाने वाले कार्टून छापे गए।
7. महिलाएं और प्रिंट (Women and Print)
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राशसुंदरी देवी (Rashsundari Debi): इन्होंने छिप-छिपकर पढ़ना सीखा और बंगाली भाषा में अपनी आत्मकथा ‘अमार जिबन’ (Amar Jiban) लिखी। यह किसी भारतीय महिला द्वारा लिखी गई पहली आत्मकथा थी।
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कैलाशबाशिनी देवी: इन्होंने महिलाओं के अनुभवों और घरों में उनके साथ होने वाले व्यवहार पर लिखा।
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ताराबाई शिंदे और पंडिता रमाबाई: इन्होंने महाराष्ट्र में ऊंची जाति की महिलाओं की दयनीय स्थिति पर लिखा। ताराबाई शिंदे ने ‘स्त्री-पुरुष तुलना’ लिखी।
8. प्रिंट और गरीब जनता (Print and Poor People)
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Public Libraries: शहरों और कस्बों में लाइब्रेरी खुलने लगीं।
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ज्योतिबा फुले (Jyotiba Phule): इन्होंने अपनी किताब ‘गुलामगिरी’ (Gulamgiri – 1871) में जाति प्रथा (Caste System) की आलोचना की।
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बी.आर. अंबेडकर और पेरियार: इनके लेखों को पूरे भारत में पढ़ा गया।
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Factory Workers: कानपुर के मिल मजदूरों ने ‘काशीबाबा’ नाम से ‘छोटे और बड़े का सवाल’ किताब छापी।
9. प्रिंट और प्रतिबंध (Print and Censorship)
जब भारतीय अखबारों ने अंग्रेजी राज की आलोचना (Criticism) शुरू की, तो अंग्रेज घबरा गए।
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Vernacular Press Act (1878): यह आयरिश प्रेस लॉ की तर्ज पर बनाया गया था।
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नियम: अगर किसी अखबार में कुछ “राजद्रोही” (Seditious) छपा, तो सरकार पहले चेतावनी देगी। अगर नहीं माने, तो प्रेस जब्त कर ली जाएगी और मशीनें छीन ली जाएंगी।
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बाल गंगाधर तिलक: उन्होंने अपने अखबार ‘केसरी’ (Kesari) में पंजाब के क्रांतिकारियों के बारे में लिखा, जिसके लिए उन्हें 1908 में जेल भेज दिया गया।