class 10 Science - Important Question & Answers

Chapter 13: हमारा पर्यावरण (Our Environment)

इस अध्याय में हम पर्यावरण, पारितंत्र, खाद्य श्रृंखला, खाद्य जाल, 10% का नियम और ओजोन परत के बारे में अध्ययन करेंगे।
यह अध्याय हमें सिखाता है कि प्रकृति में ऊर्जा का प्रवाह कैसे होता है और जीव एक-दूसरे पर कैसे निर्भर रहते हैं।
पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण की समझ भी इसी अध्याय से मिलती है।
बोर्ड परीक्षा में इस अध्याय से अक्सर संकल्पनात्मक (Concept Based) प्रश्न पूछे जाते हैं।

🔷 महत्वपूर्ण बिंदु
  1. पारितंत्र = जैविक + अजैविक घटक

  2. ऊर्जा का प्रवाह एक दिशा में होता है।

  3. 10% ऊर्जा ही अगले पोषी स्तर तक पहुँचती है।

  4. अपघटक पारितंत्र के लिए आवश्यक हैं।

  5. खाद्य जाल पारितंत्र को स्थिर बनाता है।

  6. ओजोन परत UV किरणों से रक्षा करती है।

खाद्य श्रृंखला (Food Chain)

जीवों के बीच भोजन और ऊर्जा के स्थानांतरण की सीधी श्रृंखला को खाद्य श्रृंखला कहते हैं।

उदाहरण:
घास → टिड्डा → मेंढक → साँप → बाज

✅ “महत्वपूर्ण परिभाषाएँ” (Important Definitions)

🔹 पारितंत्र (Ecosystem): जैविक और अजैविक घटकों की परस्पर क्रिया से बना तंत्र।
🔹 खाद्य श्रृंखला (Food Chain): भोजन और ऊर्जा का सीधा प्रवाह।
🔹 खाद्य जाल (Food Web): कई खाद्य श्रृंखलाओं का जुड़ा हुआ रूप।
🔹 जैव आवर्धन (Biomagnification): खाद्य श्रृंखला में विषैले पदार्थों का बढ़ना।
🔹 अपघटक (Decomposer): मृत जीवों को विघटित करने वाले जीव।

📘 अति लघु उत्तरीय प्रश्न (1 अंक)

Q1. पारितंत्र (Ecosystem) के दो मुख्य घटक कौन से हैं?

 उत्तर:

  1. जैविक घटक (Biotic): पौधे, जानवर, सूक्ष्मजीव।

  2. अजैविक घटक (Abiotic): ताप, वर्षा, मिट्टी, वायु।

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उत्तर: तीन परमाणु ($O_3$)।

उत्तर: अपघटक (Decomposers) – जैसे जीवाणु और कवक।

उत्तर: लिंडमान (Raymond Lindeman) ने।

 उत्तर: क्लोरो-फ्लोरो-कार्बन (Chloro-Fluoro-Carbon)।

📘 लघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक)

Q6.आहार श्रृंखला (Food Chain) और आहार जाल (Food Web) में एक मुख्य अंतर लिखिए।

उत्तर:

  • आहार श्रृंखला: यह जीवों की एक सीधी श्रृंखला है जिसमें एक जीव दूसरे को खाता है। (घास – हिरण – शेर)।

  • आहार जाल: यह बहुत सी आहार श्रृंखलाओं का एक नेटवर्क (जाल) है जो एक-दूसरे से जुड़ी होती हैं। यह प्रकृति में अधिक स्थिर होता है।

उत्तर:

  1. ये मृत जीवों को सड़ा-गलाकर पृथ्वी को साफ करते हैं (प्रकृति के सफाईकर्मी)।

  2. ये पोषक तत्वों को वापस मिट्टी में मिला देते हैं, जिससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है।

उत्तर:

आहार श्रृंखला के विभिन्न पोषी स्तरों (Trophic Levels) पर हानिकारक रसायनों (जैसे कीटनाशक/DDT) की मात्रा का क्रमशः बढ़ते जाना जैव आवर्धन कहलाता है। मानव आहार श्रृंखला के शीर्ष पर है, इसलिए हमारे शरीर में ये रसायन सबसे अधिक जमा होते हैं।

उत्तर:

क्योंकि प्लास्टिक अजैव निम्नीकरणीय (Non-biodegradable) है। यह सूक्ष्मजीवों द्वारा अपघटित नहीं होता और सैकड़ों वर्षों तक मिट्टी में पड़ा रहता है, जिससे मृदा प्रदूषण होता है और नालियां जाम हो जाती हैं।

 

उत्तर:

आहार श्रृंखला का प्रत्येक चरण या कड़ी जहाँ भोजन (ऊर्जा) का स्थानांतरण होता है, पोषी स्तर कहलाता है। उदाहरण: घास (प्रथम स्तर) – टिड्डा (द्वितीय स्तर) – मेंढक (तृतीय स्तर) – सांप (चतुर्थ स्तर)।

📘 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5 अंक) (Long Question Answer)

Q11. पारितंत्र में ऊर्जा के प्रवाह को एक आरेख (Diagram) की सहायता से समझाइए। यह प्रवाह एकदिशिक (Unidirectional) क्यों होता है? "10% का नियम" क्या है?

उत्तर:

ऊर्जा प्रवाह (Energy Flow): पारितंत्र में ऊर्जा का मूल स्रोत सूर्य है। हरे पौधे (उत्पादक) सूर्य की ऊर्जा का केवल 1% भाग भोजन ऊर्जा में बदलते हैं। जब शाकाहारी जीव पौधों को खाते हैं, तो ऊर्जा उनमें स्थानांतरित होती है, और फिर माँसाहारी जीवों में।

ऊर्जा प्रवाह एकदिशिक (Unidirectional) क्यों होता है? ऊर्जा का प्रवाह हमेशा एक ही दिशा में होता है और यह कभी भी विपरीत दिशा में नहीं लौटता।

  1. सूर्य से प्राप्त ऊर्जा को पौधे वापस सूर्य को नहीं दे सकते।

  2. शाकाहारी जीवों में स्थानांतरित ऊर्जा वापस पौधों में नहीं आ सकती। प्रत्येक स्तर पर ऊर्जा का ह्रास ऊष्मा के रूप में होता है, जिसका पुन: उपयोग संभव नहीं है।

10% का नियम (Ten Percent Law): लिंडमान (Lindeman) द्वारा दिए गए इस नियम के अनुसार, “एक पोषी स्तर से दूसरे पोषी स्तर तक केवल 10% ऊर्जा ही स्थानांतरित होती है। शेष 90% ऊर्जा जीव द्वारा अपनी जैविक क्रियाओं (श्वसन, पाचन, वृद्धि, प्रजनन) में खर्च हो जाती है और ऊष्मा के रूप में पर्यावरण में खो जाती है।” यही कारण है कि आहार श्रृंखला में आमतौर पर 3 या 4 चरण ही होते हैं, क्योंकि अंत में ऊर्जा बहुत कम बचती है।

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  1. उत्तर:

    ओजोन परत (Ozone Layer):

    ओजोन ($O_3$) ऑक्सीजन के तीन परमाणुओं से बना एक घातक विष है, लेकिन वायुमंडल के ऊपरी स्तर (समताप मंडल) में यह एक सुरक्षा कवच का कार्य करती है। यह सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी (UV) विकिरणों को पृथ्वी तक पहुँचने से रोकती है।

    ओजोन का निर्माण:

    सूर्य की उच्च ऊर्जा वाली UV किरणें ऑक्सीजन अणु ($O_2$) को विघटित कर देती हैं:

    1. $O_2 \xrightarrow{UV} O + O$ (ऑक्सीजन परमाणु)

    2. $O + O_2 \rightarrow O_3$ (ओजोन)

    ओजोन क्षय के कारण:

    इसका मुख्य कारण CFCs (क्लोरो-फ्लोरो-कार्बन) जैसे रसायन हैं, जिनका उपयोग रेफ्रिजरेटर, AC और अग्निशामक यंत्रों में होता है। वायुमंडल में जाकर ये क्लोरीन परमाणु मुक्त करते हैं जो ओजोन के अणुओं को नष्ट कर देते हैं।

    दुष्प्रभाव (Effects):

    यदि ओजोन परत पतली हो जाए, तो UV किरणें पृथ्वी पर आ जाएंगी जिससे:

    1. मनुष्यों में त्वचा का कैंसर और मोतियाबिंद हो सकता है।

    2. शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र कमजोर हो सकता है।

    3. पौधों की प्रकाश संश्लेषण क्रिया बाधित हो सकती है।

उत्तर:

बढ़ती जनसंख्या और उपभोक्तावाद के कारण कचरे की मात्रा बहुत बढ़ गई है। इसके निपटान के प्रमुख तरीके निम्नलिखित हैं:

  1. जैव-गैस संयंत्र (Biogas Plant): जैविक कचरे (जैसे गोबर, फलों-सब्जियों के छिलके) को बायोगैस संयंत्र में डालकर अपघटित किया जाता है। इससे न केवल बायोगैस (ईंधन) मिलती है, बल्कि उत्तम गुणवत्ता वाली खाद भी प्राप्त होती है।

  2. भराव क्षेत्र (Landfills): शहर के ठोस कचरे (जो पुनर्चक्रित नहीं हो सकता) को शहर से दूर निचले इलाकों में डाल दिया जाता है और ऊपर से मिट्टी की परत बिछा दी जाती है। कुछ समय बाद इसे पार्क में बदला जा सकता है।

  3. कंपोस्टिंग (Composting): घरेलू जैविक कचरे को एक गड्ढे में दबाकर केंचुओं (Vermicomposting) या सूक्ष्मजीवों की मदद से खाद में बदला जाता है। यह खेती के लिए बहुत उपयोगी है।

  4. पुनः चक्रण (Recycling): कागज, प्लास्टिक, कांच और धातुओं को कचरे से अलग करके फैक्ट्रियों में भेजा जाता है, जहाँ उन्हें गलाकर नई वस्तुएं बनाई जाती हैं। यह पर्यावरण बचाने का सबसे अच्छा तरीका है।

  5. भस्मीकरण (Incineration): अस्पतालों के कचरे (Medical Waste) को बहुत उच्च तापमान पर जलाकर राख बना दिया जाता है ताकि संक्रमण न फैले।

उत्तर:

जैव आवर्धन: जब हम फसलों को कीड़ों से बचाने के लिए कीटनाशकों (Pesticides) और रसायनों (जैसे DDT) का छिड़काव करते हैं, तो ये रसायन मिट्टी और पानी में मिल जाते हैं। यहाँ से ये पौधों में और फिर आहार श्रृंखला के माध्यम से अन्य जीवों में प्रवेश कर जाते हैं। चूँकि ये रसायन जैव-अनिम्नीकरणीय (Non-biodegradable) होते हैं, इसलिए ये शरीर से बाहर नहीं निकलते और हर पोषी स्तर पर इनकी मात्रा (सांद्रता) जमा होती जाती है। इसे जैव आवर्धन कहते हैं।

विभिन्न स्तरों पर प्रभाव: हाँ, इसका प्रभाव हर स्तर पर अलग होता है। सबसे ऊपरी स्तर के जीव में रसायन की मात्रा सबसे अधिक होती है। उदाहरण:

  1. पानी: DDT की मात्रा बहुत कम (0.003 ppm)।

  2. प्लवक (Zooplankton): थोड़ी अधिक (0.04 ppm)।

  3. छोटी मछली: और अधिक (0.5 ppm)।

  4. बड़ी मछली: (2 ppm)।

  5. पक्षी/मानव (शीर्ष उपभोक्ता): सबसे अधिक (25 ppm)। यही कारण है कि मनुष्यों के शरीर में कीटनाशकों की मात्रा सबसे ज्यादा पाई जाती है, जिससे कैंसर जैसी बीमारियां होती हैं।

उत्तर:

(क) अंतर:

  • आहार श्रृंखला: यह ऊर्जा प्रवाह का एक सरल और सीधा रास्ता है जिसमें एक जीव दूसरे को खाता है। यह प्रकृति में कम स्थाई होती है। (उदाहरण: घास $\rightarrow$ हिरण $\rightarrow$ शेर)।

  • आहार जाल: यह बहुत सी आहार श्रृंखलाओं का आपस में जुड़ा हुआ एक जटिल नेटवर्क है। इसमें एक जीव के पास भोजन के कई विकल्प होते हैं। यह पारितंत्र को स्थिरता प्रदान करता है।

(ख) 4-चरणीय आहार श्रृंखला:

घास (उत्पादक) – टिड्डा (प्राथमिक उपभोक्ता) – मेंढक (द्वितीयक उपभोक्ता) – सांप (तृतीयक उपभोक्ता)।

(ग) द्वितीयक उपभोक्ता (मेंढक) को हटाने का प्रभाव:

यदि मेंढकों को हटा दिया जाए, तो दो गंभीर परिणाम होंगे:

  1. टिड्डो की संख्या बढ़ जाएगी: उन्हें खाने वाला कोई नहीं होगा, जिससे वे सारी फसल/घास खा जाएंगे।

  2. सांप भूखे मर जाएंगे: उन्हें भोजन नहीं मिलेगा, जिससे उनकी प्रजाति खतरे में पड़ जाएगी या वे किसी और जीव को खाना शुरू कर देंगे, जिससे संतुलन बिगड़ जाएगा।

🌱 पर्यावरण संरक्षण क्यों आवश्यक है?

पर्यावरण संरक्षण से प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा होती है।
यह प्रदूषण को कम करता है और पृथ्वी को संतुलित बनाए रखता है।
स्वच्छ पर्यावरण स्वस्थ जीवन का आधार है।

 

10% का नियम

जब ऊर्जा एक पोषी स्तर से अगले स्तर तक जाती है, तो केवल लगभग 10% ऊर्जा ही स्थानांतरित होती है।
बाकी ऊर्जा ऊष्मा के रूप में नष्ट हो जाती है।

इसी कारण खाद्य श्रृंखला में पोषी स्तर सीमित होते हैं।

🔹 Important Points (Revision Section)
  • ऊर्जा का प्रवाह एक दिशा में होता है।

  • खाद्य जाल पारितंत्र को स्थिर बनाता है।

  • अपघटक पारितंत्र के लिए आवश्यक हैं।

  • ओजोन परत पृथ्वी की सुरक्षा करती है।

📌 परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण:
  • 10% का नियम समझाइए।

  • खाद्य श्रृंखला एवं खाद्य जाल में अंतर।

  • ओजोन परत का महत्व।

  • जैव आवर्धन क्या है?

✅ “त्वरित पुनरावृत्ति” (Quick Revision)

⚡ Quick Revision

  • उत्पादक → उपभोक्ता → अपघटक

  • ऊर्जा सूर्य से प्रारंभ होती है।

  • CFC गैसें ओजोन परत को नुकसान पहुँचाती हैं।

  • खाद्य जाल पारितंत्र को संतुलित रखता है।

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