class 10 - Science Notes
Chapter 8 - आनुवंशिकता एवं जैव विकास
यह अध्याय कक्षा 10 विज्ञान का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय है।
इस अध्याय से बोर्ड परीक्षा में हर वर्ष 5 से 8 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं।
इस अध्याय में हम आनुवांशिकता, विविधता, मेंडल के प्रयोग,
लिंग निर्धारण तथा जैव विकास से संबंधित महत्वपूर्ण अवधारणाओं को
सरल भाषा में समझेंगे।
📌 परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण बिंदु:
• परिभाषाएँ (1 अंक)
• मेंडल के नियम (2–3 अंक)
• लिंग निर्धारण (2 अंक)
• जैव विकास से जुड़े प्रश्न (5 अंक)
1. आनुवंशिकता (Heredity) क्या है?
जनक (माता-पिता) के लक्षणों का उनकी संतान में पीढ़ी-दर-पीढ़ी पहुँचना आनुवंशिकता कहलाता है।
दैनिक जीवन से संबंध:
परिवार में बच्चों का माता-पिता से मिलना-जुलना, जैसे कद, आँखों का रंग, बालों का प्रकार —
ये सभी आनुवांशिकता के उदाहरण हैं।
इसी कारण एक ही परिवार के बच्चे एक जैसे नहीं होते।
विभिन्नता (Variation): एक ही माता-पिता की संतानें पूरी तरह एक जैसी नहीं होतीं। यह अंतर DNA प्रतिकृति में सूक्ष्म बदलाव के कारण आता है।
2. मेंडल का योगदान (Mendel’s Contribution)
(मेंडल के प्रयोगों से यह सिद्ध हुआ कि लक्षण पीढ़ी दर पीढ़ी
नियमित तरीके से स्थानांतरित होते हैं।
इन्हीं प्रयोगों के आधार पर बाद में आनुवांशिकता के नियम
तैयार किए गए, जो आज भी विज्ञान की नींव हैं।)
ग्रेगर जॉन मेंडल को “आनुवंशिकी का जनक” कहा जाता है। उन्होंने मटर के पौधे (Pisum sativum) पर अपने प्रयोग किए।
मटर के पौधे को चुनने के कारण:
इसमें विपरीत लक्षण स्पष्ट रूप से दिखते थे (जैसे- लंबा/बौना पौधा, गोल/झुर्रीदार बीज)।
इसका जीवनकाल छोटा था।
इसमें स्व-परागण और कृत्रिम पर-परागण आसानी से कराया जा सकता था।
3. मेंडल के प्रयोग
एक-संकर संकरण (Monohybrid Cross): जब केवल एक जोड़े विपरीत लक्षणों का अध्ययन किया गया (जैसे पौधों की लंबाई)।
F1 पीढ़ी: सभी पौधे लंबे थे।
F2 पीढ़ी: 3 पौधे लंबे और 1 पौधा बौना निकला (अनुपात 3:1)।
द्वि-संकर संकरण (Dihybrid Cross): जब दो जोड़ों के विपरीत लक्षणों का एक साथ अध्ययन किया गया (जैसे बीजों का आकार और रंग)।
इसका परिणाम 9:3:3:1 के अनुपात में मिला।
4. प्रभावी और अप्रभावी लक्षण (Dominant and Recessive)

प्रभावी लक्षण: वे लक्षण जो F1 पीढ़ी में दिखाई देते हैं (जैसे- लंबापन ‘T’)।
अप्रभावी लक्षण: वे लक्षण जो छिपे रहते हैं और केवल F2 पीढ़ी में खुद को व्यक्त करते हैं (जैसे- बौनापन ‘t’)।
5. मानव में लिंग निर्धारण (Sex Determination in Humans)
यह परीक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण टॉपिक है।

मानव में 23 जोड़े गुणसूत्र (Chromosomes) होते हैं।
22 जोड़े एक जैसे होते हैं, लेकिन 23वाँ जोड़ा लिंग गुणसूत्र होता है।
पुरुष: XY गुणसूत्र होते हैं।
महिला: XX गुणसूत्र होते हैं।
लिंग निर्धारण की प्रक्रिया:
यदि पिता का X गुणसूत्र माता के X गुणसूत्र से मिलता है, तो लड़की (XX) पैदा होती है।
यदि पिता का Y गुणसूत्र माता के X गुणसूत्र से मिलता है, तो लड़का (XY) पैदा होता है।
निष्कर्ष: बच्चे का लिंग पूरी तरह से पिता से मिलने वाले गुणसूत्र पर निर्भर करता है
महत्वपूर्ण शब्दावली:
जीन (Gene): आनुवंशिकता की इकाई जो DNA का एक हिस्सा है।
जीनोटाइप (Genotype): किसी जीव की आनुवंशिक रचना (जैसे TT या Tt)।
फिनोटाइप (Phenotype): जीव के बाहरी लक्षण (जैसे लंबा या बौना दिखना)।
छात्रों द्वारा की जाने वाली सामान्य गलतियाँ:
• जीन और गुणसूत्र में अंतर न समझ पाना
• जीनोटाइप और फिनोटाइप को आपस में मिला देना
• लिंग निर्धारण में माता की भूमिका गलत समझना
बोर्ड परीक्षा के लिए उत्तर लिखने के सुझाव:
• परिभाषा साफ और सीधी भाषा में लिखें
• उदाहरण अवश्य दें
• तकनीकी शब्द अंग्रेज़ी में भी लिख सकते हैं
• आरेख वाले प्रश्नों में साफ लेबल करें
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:
प्रश्न: क्या यह अध्याय परीक्षा के लिए कठिन है?
उत्तर: नहीं, सही समझ के साथ यह अध्याय आसान है।
प्रश्न: क्या ये नोट्स revision के लिए पर्याप्त हैं?
उत्तर: हाँ, ये नोट्स त्वरित पुनरावृत्ति के लिए उपयोगी हैं।
🔗 संबंधित अध्याय: Notes
- Chapter 1 -रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण
- Chapter 2 – अम्ल, क्षार और लवण
- Chapter 3 – धातु और अधातु
- Chapter 4 – कार्बन एवं उसके यौगिक
- Chapter 5 – जैव प्रक्रम
- Chapter 6 – नियंत्रण एवं समन्वय
- Chapter 7 – जीव जनन कैसे करते हैं
- Chapter 8 – आनुवंशिकता एवं जैव विकास
- Chapter 9 – प्रकाश – परावर्तन तथा अपवर्त
- Chapter 10 – मानव नेत्र तथा रंगीन संसार
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- Chapter 12 – विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव
- Chapter 13 – हमारे पर्यावरण