class 10 - Science Notes

Chapter 3 - धातु एवं अधातु

इस अध्याय में विद्यार्थी धातु और अधातु के बीच अंतर, उनकी दैनिक जीवन में उपयोगिता, उद्योगों में भूमिका तथा परीक्षा में पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण बिंदुओं को सरल भाषा में समझेंगे। यह अध्याय बोर्ड परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।

 

🔹 यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है?

धातु एवं अधातु हमारे दैनिक जीवन, उद्योग और विज्ञान की नींव हैं। इस अध्याय की अच्छी समझ से विद्यार्थी न केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त कर सकते हैं, बल्कि आगे की कक्षाओं के लिए भी मजबूत आधार बना सकते हैं।

🔹 परीक्षा उपयोगी बिंदु (Board Exam Focus)
  • धातु और अधातु से 2–3 अंक के प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं

  • आघातवर्ध्यता और तन्यता पर अंतर पूछना सामान्य है

  • संक्षारण और मिश्रधातु से 5 अंक का प्रश्न आ सकता है

इस अध्याय में हम धातुओं के गुणों, उनकी अभिक्रियाशीलता और वे प्रकृति में कैसे पाए जाते हैं, इसके बारे में विस्तार से पढ़ेंगे।

1. भौतिक गुणधर्म (Physical Properties)
गुणधर्मधातु (Metals)अधातु (Non-Metals)
अवस्थासामान्यतः ठोस (पारा/Mercury को छोड़कर)ठोस, द्रव या गैस हो सकते हैं
चमकधात्विक चमक होती हैचमक नहीं होती (आयोडीन को छोड़कर)
आघातवर्ध्यताइन्हें पीटकर पतली चादर बनाया जा सकता हैये भंगुर (Brittle) होते हैं, टूट जाते हैं
तन्यताइनके लंबे तार खींचे जा सकते हैंतार नहीं खींचे जा सकते
चालकताऊष्मा और विद्युत के सुचालक होते हैंकुचालक होते हैं (ग्रेफाइट को छोड़कर)

2. धातुओं के रासायनिक गुणधर्म
(i) वायु के साथ अभिक्रिया:

धातुएं ऑक्सीजन के साथ मिलकर धातु ऑक्साइड बनाती हैं।

  • $2Cu + O_2 \rightarrow 2CuO$ (कॉपर ऑक्साइड – काला रंग)

  • उभयधर्मी ऑक्साइड (Amphoteric Oxides): वे ऑक्साइड जो अम्ल और क्षारक दोनों से अभिक्रिया करते हैं (जैसे: $Al_2O_3$ और $ZnO$)।

(ii) जल के साथ अभिक्रिया:
  • कुछ धातुएं ठंडे जल से क्रिया करती हैं (Na, K)।

  • कुछ गर्म जल से (Mg)।

  • कुछ केवल भाप (Steam) से क्रिया करती हैं (Fe, Al)।

(iii) सक्रियता श्रेणी (Reactivity Series):

यह वह सूची है जिसमें धातुओं को उनकी क्रियाशीलता के घटते क्रम में व्यवस्थित किया गया है।

  • सबसे ऊपर: Potassium (K), Sodium (Na) – ये बहुत क्रियाशील हैं।

  • सबसे नीचे: Gold (Au), Silver (Ag) – ये स्वतंत्र अवस्था में पाए जाते हैं।


3. आयनिक यौगिक (Ionic Compounds)

धातु से अधातु में इलेक्ट्रॉन के स्थानांतरण से बने यौगिकों को आयनिक यौगिक कहते हैं।

  • गुण: इनका गलनांक और क्वथनांक बहुत उच्च होता है, ये जल में घुलनशील होते हैं और जलीय विलयन में विद्युत के सुचालक होते हैं।


4. धातुकर्म (Metallurgy): अयस्क से धातु प्राप्त करना

धातुओं को उनके अयस्कों (Ores) से शुद्ध रूप में प्राप्त करने की प्रक्रिया को धातुकर्म कहते हैं। इसमें तीन मुख्य चरण होते हैं:

    1. अयस्कों का समृद्धीकरण: मिट्टी-रेत जैसी अशुद्धियों (गैंग) को हटाना।

    2. धातु का निष्कर्षण:

      • भर्जन (Roasting): सल्फाइड अयस्क को वायु की उपस्थिति में गर्म करना।

      • निस्तापन (Calcination): कार्बोनेट अयस्क को सीमित वायु में गर्म करना।

    3. परिष्करण (Refining): धातु को पूरी तरह शुद्ध करना (विद्युत अपघटनी परिष्करण)।

 

5. संक्षारण (Corrosion) से सुरक्षा

धातुओं को जंग से बचाने के लिए निम्नलिखित तरीके अपनाए जाते हैं:

  • पेंट करना या तेल लगाना।

  • यशदलेपन (Galvanization): लोहे पर जस्ते (Zinc) की परत चढ़ाना।

  • मिश्रधातु बनाना (Alloying): दो या अधिक धातुओं को मिलाकर उनके गुणों को सुधारना (जैसे: पीतल, कांसा, स्टेनलेस स्टील)।

🔹 दैनिक जीवन में उदाहरण
  • लोहे पर जंग लगना → पुल और गाड़ियों की मजबूती कम होती है

  • तांबा और एल्यूमिनियम → बिजली के तार बनाने में उपयोग

  • स्टील (मिश्रधातु) → इमारत और मशीन निर्माण में प्रयोग

🔹 महत्वपूर्ण प्रश्न–उत्तर

Q1. सोडियम को केरोसिन में क्यों रखा जाता है?
उत्तर: क्योंकि सोडियम वायु और जल के साथ तीव्र प्रतिक्रिया करता है।

Q2. ग्रेफाइट अधातु होते हुए भी चालक क्यों है?
उत्तर: क्योंकि इसमें मुक्त इलेक्ट्रॉन उपलब्ध होते हैं।

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